कर्नाटक सरकार केंद्र से करेगी मूल्य नियंत्रण की मांग, लंबे इलाज वाले मरीजों को राहत की उम्मीद
हुब्बल्ली। महंगी दवाओं का बोझ कम करने के लिए कर्नाटक सरकार अब हृदय और किडनी रोगों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतें नियंत्रित कराने की पहल करेगी। कैंसर की दवाओं के बाद राज्य का औषधि प्रशासन विभाग इन दवाओं की कीमतों का आकलन कर केंद्र सरकार से आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध करेगा।
हृदय रोग की दवाओं पर नजर
हृदय रोगियों को लंबे समय तक दवाएं लेनी पड़ती हैं, जिससे इलाज का खर्च बढ़ जाता है। इसे देखते हुए विभाग रक्तचाप नियंत्रित करने, हृदय की विफलता का उपचार करने, धडक़न नियमित रखने और खून के थक्के रोकने वाली दवाओं की जानकारी जुटा रहा है। हृदयाघात के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।
विभाग दवाओं की खरीद लागत और बाजार में उनकी बिक्री कीमत के अंतर का आकलन कर उन दवाओं की सूची तैयार करेगा, जिनकी कीमतें नियंत्रित करना जरूरी माना जाएगा।
किडनी रोगियों को राहत की उम्मीद
किडनी रोगियों और नियमित डायलिसिस कराने वालों के लिए दवाओं का खर्च बड़ी चुनौती है। ऐसे मरीजों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक दवाओं की कीमतों का भी आकलन किया जा रहा है।
सूची तैयार होने के बाद राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) को पत्र लिखकर संबंधित दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाने की मांग करने का निर्णय किया है।
केंद्र के फैसले पर निगाहें
इस पहल से लंबे समय तक इलाज कराने वाले हृदय और किडनी रोगियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किन दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में शामिल किया जाएगा और उनकी कीमतों में कितनी कमी होगी, यह केंद्र सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
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