नदियों को जोडऩे की योजना के खिलाफ 10 हजार से अधिक लोग सडक़ पर उतरे

यल्लापुर में चार घंटे राष्ट्रीय राजमार्ग जाम, स्वर्णवल्ली मठ के मार्गदर्शन में आंदोलनकारियों ने लिया संकल्प

राज्य और केंद्र सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम

यल्लापुर (उत्तर कन्नड़)। वरदा-बेडती और अघनाशिनी-वेदावती नदी जोडऩे की परियोजनाओं के विरोध में मंगलवार को यल्लापुर में बड़ा जनआंदोलन हुआ। स्वर्णवल्ली मठ के संतों के मार्गदर्शन में आयोजित प्रदर्शन में जिले के विभिन्न हिस्सों से 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर चार घंटे तक चक्का-जाम कर परियोजनाओं के प्रति नाराजगी जताई।

प्रदर्शनकारियों ने पश्चिमी घाट के संवेदनशील पर्यावरण और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बचाने की मांग की। आंदोलन के दौरान कई प्रस्ताव पारित किए गए और राज्य तथा केंद्र सरकार को निर्णय लेने के लिए 15 दिन का समय दिया गया।

15 दिन में निर्णय नहीं तो चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

बेडती-अघनाशिनी घाटी संरक्षण समिति ने चेतावनी दी कि यदि अगले 15 दिनों में सरकार ने परियोजनाओं पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया तो जनप्रतिनिधियों को जनता के आक्रोश का एहसास कराया जाएगा। पश्चिमी घाट के पर्यावरण संरक्षण के लिए आगामी सभी आम चुनावों में मतदान बहिष्कार जैसा कदम उठाने पर भी विचार किया जाएगा।

सुबह करीब 10.30 बजे सिरसी रोड स्थित टीएमएस सुपर मार्केट के सामने सभा हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी रैली के रूप में राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंचे और करीब चार घंटे तक रास्ता रोके रखा। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आंदोलन में शामिल हुए।

जनता का आक्रोश केंद्र सरकार तक पहुंचा : कागेरी

सांसद विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने कहा कि जिले के लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं और उनकी भावनाओं को समझते हैं। जनता की आवाज राज्य और केंद्र सरकार के प्रमुखों तक पहुंचाई गई है। आगे भी सभी जनप्रतिनिधि मिलकर इन परियोजनाओं का विरोध करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना 1980 के दशक से चर्चा में है। प्रकृति के नाराज होने पर क्या परिणाम हो सकते हैं, यह सभी देख चुके हैं। इसलिए परियोजना को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने पर्यावरण विशेषज्ञ बी.एम. कुमारस्वामी से भी कहा कि आंदोलन में राजनीति को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

नदी मोडऩे के आंदोलन में राजनीति न हो : हेब्बार

विधायक शिवराम हेब्बार ने कहा कि इस आंदोलन में किसी भी स्थिति में राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे आंदोलन कमजोर होगा। स्वर्णवल्ली मठ के संतों के नेतृत्व और मार्गदर्शन में जिले के जनप्रतिनिधि परियोजना रोकने के लिए एकजुट होकर प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता की भावनाओं को जनप्रतिनिधि समझते हैं और संतों के निर्देशों की अनदेखी नहीं की जाएगी।

उत्तर कन्नड़ जिले को अब कोई नई परियोजना नहीं चाहिए

सिरसी के विधायक भीमण्णा नाइक ने कहा कि आने वाली पीढिय़ों के हित में इस परियोजना को रोकना जरूरी है। उत्तर कन्नड़ त्याग करने वाला जिला रहा है, अब यहां किसी नई परियोजना की जरूरत नहीं है। सूखे के कारण लोगों को पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सभी जनप्रतिनिधि एकजुट होकर परियोजना रोकने का प्रयास करेंगे।

कुमटा के विधायक दिनकर शेट्टी ने कहा कि जिले के विधायक और सांसद एकजुट होकर विरोध करें तो परियोजना को रोका जा सकता है। दूसरे जिलों की तुलना में उत्तर कन्नड़ में कई परियोजनाएं लाई जा रही हैं। वे इस आंदोलन का पूरा समर्थन करते हैं।

परियोजना पर हजारों करोड़ रुपए खर्च करना व्यर्थ : कुमारस्वामी

पर्यावरण विशेषज्ञ बी.एम. कुमारस्वामी ने कहा कि प्रस्तावित नदी जोड़ परियोजनाओं के लिए नदियों में पर्याप्त पानी ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस पर हजारों करोड़ रुपए खर्च करना व्यर्थ होगा। केंद्रीय सिंचाई विकास बोर्ड की सहमति मिलने के बावजूद परियोजना का विरोध जारी रहना चाहिए। राज्य सरकार को इसे रोकने की पहल करनी चाहिए और जनप्रतिनिधियों को परियोजना के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

घाटी संरक्षण समिति के अध्यक्ष अनंत हेगड़े अशिसर ने जिले की जलधारण क्षमता का वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की। उन्होंने आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

आंदोलन समिति के अध्यक्ष एन.के. भट्ट अग्गाशिकुंब्री ने प्रस्तावना रखी। प्रधान संचालक हरिप्रकाश कोणेमा ने स्वागत किया और आंदोलन में पारित प्रस्ताव पढक़र सुनाए। शिवप्रसाद भट्ट ने कार्यक्रम का संचालन किया। मातृमंडली की महिलाओं ने पर्यावरण गीत, भजन और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीष शशि ने आंदोलनकारियों से ज्ञापन स्वीकार किया और कहा कि उनकी मांगों की जानकारी राज्य तथा केंद्र सरकार तक पहुंचाई जाएगी। प्रदर्शन के दौरान एहतियात के तौर पर पुलिस का कड़ा बंदोबस्त किया गया था।

आंदोलन के बीच बेडती-वरदा क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण!

नदी जोड़ परियोजना के विरोध में प्रदर्शन जारी रहने के दौरान मंगलवार सुबह करीब 8.30 बजे से बेडती-वरदा नदी क्षेत्र में हवाई सर्वेक्षण किए जाने की चर्चा रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक विमान परियोजना से संबंधित सीमित क्षेत्र में तीन से चार बार चक्कर लगाता दिखाई दिया।

क्या सरकार ने स्थल सर्वेक्षण के लिए हवाई सर्वेक्षण कराया है? इसे लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस सर्वेक्षण के उद्देश्य और सरकारी एजेंसी की ओर से कराए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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