पांच बैंकों से करोड़ों की निकासी
फर्जी सिम कार्ड, किराए के बैंक खाते और कारोबार की आड़ में अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय
नौ साल में 1,607 मामले, 65 आरोपी गिरफ्तार, 1,184 लोग बने शिकार
हुब्बल्ली। देशभर में साइबर ठगी के जरिए लोगों की मेहनत की कमाई लूटने वाले गिरोहों के लिए हुब्बल्ली अब एक अहम वित्तीय केंद्र बनता नजर आ रहा है। दूसरे राज्यों में लोगों से ठगी गई करोड़ों रुपए की रकम शहर के पांच बैंकों से चेक के जरिए निकाले जाने का खुलासा हुआ है। बेंगलूरु साइबर अपराध जांच इकाई से मिली सूचना के बाद हुब्बल्ली की सीईएन पुलिस ने जांच शुरू की है। फर्जी सिम कार्ड, किराए के बैंक खाते और छोटे कारोबारों की आड़ में चल रहे इस नेटवर्क ने साइबर अपराध की गंभीरता उजागर कर दी है।
हुब्बल्ली-धारवाड़ में साइबर अपराध का फैलता दायरा पुलिस के आंकड़ों से भी सामने आता है। वर्ष 2018 से 27 अक्टूबर 2026 तक साइबर अपराध पुलिस थाने में 1,607 मामले दर्ज किए गए। इनमें 1,184 लोग ठगी का शिकार हुए और उनकी कुल 102.67 करोड़ रुपए की रकम ठग ली गई। पुलिस ने 65 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। ठगी की रकम में से 38.38 करोड़ रुपए विभिन्न बैंक खातों में रोकने में सफलता मिली, जबकि 24.71 करोड़ रुपए पीडि़तों को लौटाए गए हैं।
पांच बैंकों से निकासी ने बढ़ाई चिंता
साइबर अपराध की जांच में नया मोड़ तब आया, जब बेंगलूरु की साइबर अपराध जांच इकाई ने संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की। इसमें हुब्बल्ली के पांच बैंकों से चेक के माध्यम से करोड़ों रुपए निकाले जाने की जानकारी सामने आई। जांच एजेंसियों को संदेह है कि देश के विभिन्न हिस्सों में ठगी गई रकम स्थानीय बैंक खातों के जरिए निकाली जा रही थी। सीईएन पुलिस अब निकासी करने वालों, खाताधारकों और ठगी के नेटवर्क के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।
फर्जी सिम और बैंक खातों से चल रहा खेल
ठगी के लिए अपराधी अब केवल फर्जी फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं। गलत दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड हासिल कर लोगों को फोन और संदेश भेजे जाते हैं। बैंक केवाईसी अद्यतन, ऑनलाइन निवेश में भारी मुनाफा, नौकरी और अन्य प्रलोभनों के जरिए लोगों को जाल में फंसाया जाता है। ठगी की रकम को कई बैंक खातों में स्थानांतरित कर निकाल लिया जाता है, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो।
पुलिस जांच में स्पेयर पार्ट्स की दुकानों और छोटे कारोबारों की आड़ में साइबर ठगी का नेटवर्क चलाने का मामला भी सामने आया है। इस गिरोह से जुड़े 31 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी मिली है। ठगी की रकम के लेनदेन के लिए युवाओं और जरूरतमंद लोगों के बैंक खाते कमीशन या किराए पर लिए जा रहे थे। खाताधारकों से एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और सिम कार्ड लेकर उनका इस्तेमाल किया जाता था।
2023 में सर्वाधिक 423 मामले
वर्षवार आंकड़ों के अनुसार, साइबर ठगी के सर्वाधिक 423 मामले वर्ष 2023 में दर्ज हुए। वर्ष 2022 में 344, 2024 में 184 और 2025 में 144 मामले सामने आए। वर्ष 2026 में 27 अक्टूबर तक 101 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराधियों के तरीके बदल रहे हैं और ठगी का नेटवर्क स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराज्यीय स्तर तक फैल रहा है।
खाते देने वाले भी कानूनी शिकंजे में
आसान कमाई और कमीशन के लालच में बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड दूसरों को सौंपने वाले युवाओं के लिए भी यह गंभीर चेतावनी है। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है। खाताधारक यह कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते कि उन्हें खाते के इस्तेमाल की जानकारी नहीं थी। पुलिस ऐसे मामलों में खाताधारकों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
साइबर पुलिस ने लोगों से अनजान फोन कॉल, संदिग्ध संदेश, निवेश के प्रलोभन और इंटरनेट लिंक से सतर्क रहने की अपील की है। ओटीपी, बैंकिंग जानकारी और खाते से संबंधित दस्तावेज किसी को न देने तथा साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन में नागरिकों को सावधान रहना चाहिए। ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों, सिम कार्ड और बिचौलियों पर भी निगरानी रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों तक ठगी की रकम पहुंचाने वाले माध्यमों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। केवल पीडि़तों को सतर्क रहने की सलाह देने से साइबर अपराध पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा सकता।
सामाजिक कार्यकर्ता श्रीधर कंदगल ने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में ऑनलाइन भुगतान, निवेश और बैंकिंग लेनदेन के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। जागरूकता जरूरी है, लेकिन केवल जागरूकता से साइबर ठगी नहीं रुकेगी। ठगी की रकम के लेनदेन में मदद करने वाले बैंक खातों, सिम कार्ड उपलब्ध कराने वालों और बिचौलियों पर भी निगरानी रखनी होगी।
प्रमुख आंकड़े — साइबर ठगी का हिसाब
विवरण — आंकड़ा
कुल दर्ज मामले — 1,607
ठगी के शिकार — 1,184
गिरफ्तार आरोपी — 65
कुल ठगी — 102.67 करोड़ रुपए
खातों में रोकी गई रकम 38.38 करोड़ रुपए
पीडि़तों को लौटाई गई रकम — 24.71 करोड़ रुपए
सर्वाधिक मामले (2023) — 423
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