चावल का कटोरा कंप्ली यूरिया की कमीकंप्ली तालुक देवलापुर प्राथमिक कृषि सहकारिता संघ उपलब्ध यूरिया खाद।

किसान परेशान

3917 हेक्टेयर सूखा क्षेत्र

21,729 हेक्टेयर धान क्षेत्र के लिए यूरिया की मांग

बल्लारी. खेती के लिए अत्यावश्यक रासायनिक उर्वरक यूरिया की कमी इस समय चावल का कटोरा कहे जाने वाले कंप्ली तालुक के किसानों को संकट में डाल रही है।

इस बार वर्षा पर निर्भर भूमि में ज्वार, मक्का, सूरजमुखी, नवणी (धान की एक किस्म), तुअर और बाजरा की फसलें बोई गई हैं, परन्तु किसानों को समय पर यूरिया उर्वरक नहीं मिल रहा है।

अब जबकि तुंगभद्रा की दाहिनी शाखा की ऊपरी और निचली नहरों में पानी छोड़ा गया है, धान की रोपाई समेत विभिन्न फसलों की बुवाई जोरों पर है परन्तु रोपाई से पहले यूरिया जमा करने के लिए किसानों के पास उर्वरक नहीं है, जिससे वे हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
मांग की तुलना में आपूर्ति कम होने के कारण कुछ व्यापारियों के पास उपलब्ध यूरिया को किसानों को ऊंचे दामों पर खरीदना पड़ रहा है।

किसानों के लिए बना बोझ

होन्नल्ली के किसान वीरेंद्र ने कहा कि उपलब्ध थोड़े से उर्वरक के लिए किसान आपस में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसी का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी यूरिया के साथ कीटनाशक और अन्य उत्पाद भी खरीदने का दबाव बना रहे हैं। यह किसानों के लिए बोझ बन गया है।

अगले एकाध दिनों में स्टॉक खत्म हो जाएगा

किसानों ने बताया कि 45 किलो यूरिया की बोरी 265 से 300 रुपए में बेची जा रही है। तालुक में फिलहाल गिने-चुने सहकारी संघ और निजी व्यापारियों के पास ही यह उपलब्ध है। तुंगभद्रा नहरों में पानी छोड़े जाने के कारण अगले एकाध दिनों में यह स्टॉक भी खत्म हो जाएगा।

हजारों एकड़ में यूरिया की मांग

सूखे क्षेत्र की 3917 हेक्टेयर भूमि, तुंगभद्रा की दाहिनी शाखा की निचली नहर क्षेत्र की लगभग 6685 हेक्टेयर और ऊपरी नहर क्षेत्र की लगभग 6174 हेक्टेयर भूमि में धान की रोपाई की जाती है। तालाब, कुएं, लिफ्ट सिंचाई, विजयनगर नहर और तुंगभद्रा नदी घाटी क्षेत्र की 8870 हेक्टेयर भूमि में भी धान की रोपाई की गई है। कुल 21,729 हेक्टेयर धान क्षेत्र के लिए यूरिया की मांग है।

नैनो यूरिया के उपयोग में झिझक रहे हैं किसान

पौधा छोटा होने पर नैनो यूरिया का छिडक़ाव ठीक से नहीं पहुंच पाता है। इस कारण से किसान इसकी शुरुआत में ही उपयोग करने से हिचकिचा रहे हैं। सही जानकारी की कमी और संदेह आज भी किसानों में बने हुए हैं। यदि कृषि विशेषज्ञ जागरूकता फैलाएं, तो किसान इसका अधिक उपयोग कर सकते हैं।

व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करें

निर्धारित मूल्य पर ही यूरिया बेचना चाहिए। उर्वरक के साथ अन्य उत्पादों को खरीदने के लिए दबाव बना रहे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
बी.वी. गौड़ा, जिला अध्यक्ष, राज्य किसान संघ और हरित सेना, कंप्ली

सहयोग करे किसान

कंप्ली तालुक को आवश्यक यूरिया अगले पांच-छह दिनों में उपलब्ध कराया जाएगा, तब तक किसानों को सहयोग करना चाहिए। वैकल्पिक रूप से नैनो यूरिया घोल का उपयोग किया जा सकता है।
सी.ए. मंजुनाथ रेड्डी, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, सिरुगुप्पा

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By Bharat Ki Awaz

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