मोलकाल्मूरु को आंध्र में मिला दो : कांग्रेस विधायक गोपालकृष्णकांग्रेस विधायक गोपालकृष्ण।

विवादित बयान पर भाजपा और जनता में आक्रोश

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कहा-‘आप चाहें तो दक्षिण अफ्रीका जाकर चुनाव लड़ें’

चित्रदुर्ग। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एन.वाई. गोपालकृष्ण के मोलकाल्मूरु विधानसभा क्षेत्र को आंध्र प्रदेश में शामिल करने या चल्लकेरे से जोडऩे संबंधी बयान ने कर्नाटक की राजनीति में हलचल मचा दी है। विधायक का अपनी ही सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए दिया गया भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मंच से जताई नाराजगी

मोलकाल्मूरु में डॉ. बी.आर. आंबेडकर भवन के शिलान्यास समारोह में बोलते हुए विधायक ने क्षेत्र के पिछड़ेपन और उन्हें अपेक्षित अधिकार नहीं मिलने पर नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि मोलकाल्मूरु छोटा तालुक होने के साथ राज्य के एक छोर पर स्थित है, इसलिए सरकार का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा। 25-30 वर्षों से विधायक रहने के बावजूद उन्हें क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए।

विधायक ने कहा कि क्षेत्र के एक ओर पहाडिय़ां, दूसरी ओर रेलवे लाइन और तीसरी ओर आंध्र प्रदेश की सीमा है। ऐसे में उन्होंने नाराजगी में कहा कि “इस तरह फंसे रहने के बजाय मोलकाल्मूरु को आंध्र प्रदेश में या फिर पड़ोसी चल्लकेरे विधानसभा क्षेत्र में मिला दिया जाए।”

भाजपा का हमला, सोशल मीडिया पर भी नाराजगी

विधायक के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस विधायक के बयान की आलोचना की। सार्वजनिक स्तर पर भी इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

सोशल मीडिया यूजर्स ने तंज कसते हुए कहा कि “आप चाहें तो दक्षिण अफ्रीका जाकर चुनाव लड़ें, हम तो कर्नाटक में ही रहेंगे।”

विवाद बढ़ा तो विधायक ने दी सफाई

बयान विवादित होने के बाद विधायक एन.वाई. गोपालकृष्ण ने सफाई देते हुए कहा कि पिछड़े मोलकाल्मूरु क्षेत्र को संविधान के अनुच्छेद 371(जे) के तहत मिलने वाली विशेष सुविधाओं की मांग करते समय उन्होंने भावावेश में आंध्र प्रदेश में शामिल करने की बात कह दी थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल यह बताना था कि क्षेत्र के विकास के लिए विशेष दर्जे की सुविधाएं जरूरी हैं।

मंत्री पद नहीं मिलने की नाराजगी?

हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान वरिष्ठ विधायक एन.वाई. गोपालकृष्ण मंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे। हालांकि अंतिम समय में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। इसके बाद उनके और समर्थकों के बीच पार्टी नेतृत्व को लेकर नाराजगी की चर्चा थी।

राजनीतिक हलकों में अब यह भी माना जा रहा है कि मंत्री पद नहीं मिलने और अपने विधानसभा क्षेत्र की कथित उपेक्षा के प्रति नाराजगी ने ही सार्वजनिक मंच पर इस तरह का रूप लिया।

 

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By Bharat Ki Awaz

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