21 साल बाद पलटा पासा, बेलगावी ने कहा—‘कर्नाटक हमारा’महापौर प्रीति कामकर।

2005 में एमइएस के शासनकाल में महाराष्ट्र के पक्ष में पारित हुआ था प्रस्ताव

21 साल बाद महानगर निगम परिषद ने सर्वसम्मति से कर्नाटक के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया

सरकार के निर्देश पर हुई कार्रवाई

महापौर ने दी रूूलिंग, एमइएस समर्थित तीन पार्षदों ने किया बहिर्गमन

सुप्रीम कोर्ट में सीमा विवाद की सुनवाई लंबित

बेलगावी। कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद के बीच बेलगावी महानगर निगम परिषद ने बुधवार को महत्वपूर्ण राजनीतिक-सांवैधानिक रुख दर्ज कराया। नगर निगम ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि महाजन आयोग की रिपोर्ट ही सीमा विवाद के संदर्भ में अंतिम आधार है और बेलगावी कर्नाटक का अभिन्न अंग है। इस फैसले के साथ ही वर्ष 2005 में महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमइएस) के नेतृत्व वाले तत्कालीन नगर निगम प्रशासन द्वारा महाराष्ट्र के पक्ष में पारित प्रस्ताव को 21 साल बाद जवाब मिला है।

नगर निगमा की सामान्य सभा में आयुक्त ने शहरी विकास विभाग के अवर सचिव की ओर से 29 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्र को परिषद के समक्ष रखा। पत्र में कहा गया था कि कर्नाटक विधानसभा महाजन आयोग की रिपोर्ट को अंतिम मानते हुए उसके पूर्ण क्रियान्वयन के समर्थन में दो बार प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इसी आधार पर बेलगावी महानगर निगम को भी कर्नाटक के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट करने वाला प्रस्ताव पारित करने का निर्देश दिया गया था।

सरकार के निर्देश के बाद उपमहापौर हनमंत कोंगाली ने महापौर प्रीति कामकर से प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया। विषय को सभा के समक्ष रखते हुए महापौर ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किए जाने की रूूलिंग दी। प्रस्ताव पारित होते ही नामित सदस्य रमेश सोंटक्की ने महापौर और उपमहापौर को बधाई दी।

इस घटनाक्रम से सीमा विवाद को लेकर नगर निगम का आधिकारिक रुख अब स्पष्ट रूप से दर्ज हो गया है। पिछले कई वर्षों से कन्नड़ समर्थक संगठनों की ओर से मांग की जा रही थी कि नगर निगम बेलगावी को कर्नाटक का अभिन्न अंग बताते हुए आधिकारिक प्रस्ताव पारित करे। इस मांग को लेकर ज्ञापन, प्रदर्शन और विभिन्न स्तरों पर दबाव बनाया जाता रहा है।

एमइएस समर्थक तीन पार्षद बाहर निकले

प्रस्ताव का विरोध करते हुए महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमइएस) समर्थित तीन पार्षद सभा से बाहर चले गए। उनका तर्क था कि सीमा विवाद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, ऐसे में नगर निगम को इस विषय पर प्रस्ताव पारित नहीं करना चाहिए। इस विरोध के बावजूद परिषद ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

2005 के प्रस्ताव का 2026 में जवाब

वर्ष 2005 में बेलगावी महानगर निगम में एमइएस के नेतृत्व वाला प्रशासन था। उस समय महाराष्ट्र के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया गया था। अब 21 वर्ष बाद निगम परिषद ने कर्नाटक के पक्ष में प्रस्ताव पारित कर सीमा विवाद में अपना रुख दर्ज कराया है।

सीमा विवाद की पृष्ठभूमि

महाराष्ट्र लंबे समय से बेलगावी समेत कर्नाटक के सीमावर्ती मराठी भाषी क्षेत्रों पर दावा करता रहा है। महाराष्ट्र की ओर से बेलगावी सहित 865 मराठी भाषी गांवों और कस्बों को महाराष्ट्र में शामिल करने की मांग भी उठाई जाती रही है। सीमा विवाद को लेकर मूल मुकदमा वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया था और मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में लंबित है।

बेलगावी नगर निगम के बुधवार के प्रस्ताव के बाद अब सीमा विवाद को लेकर स्थानीय निकाय का आधिकारिक रुख भी स्पष्ट रूप से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है।

 

Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?

अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें

हर खबर सबसे पहले

Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *