प्रसव के दौरान समस्या
हुब्बल्ली. धारवाड़ जिले में पिछले पांच वर्षों में सिजेरियन (ऑपरेशन) द्वारा होने वाले प्रसव का प्रतिशत काफी बढ़ा है। वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक कुल 1,61,340 प्रसव हुए, जिनमें से 96,959 सामान्य और 64,381 ऑपरेशन द्वारा संपन्न हुए।
केवल चालू वित्तीय वर्ष (जून 2024 तक) में ही 7,420 प्रसव हुए, जिनमें 3,896 सामान्य और 3,524 सिजेरियन रहे।
कारण और परिस्थितियां
जिला स्वास्थ्य अधिकारी एस.एम. होनकेरी ने बताया कि देर से गर्भधारण (अक्सर 30 वर्ष के बाद), प्रसव पीड़ा की सहनशक्ति की कमी, गर्भावस्था में मधुमेह, मानसिक तनाव, शिशु को खतरा जैसी परिस्थितियों में डॉक्टर सिजेरियन की सलाह देते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को केवल जटिल परिस्थितियों में ही ऑपरेशन की अनुमति दी है। यदि किसी अस्पताल में जानबूझकर सिजेरियन कराया गया हो, तो लोग शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं को नियमित व्यायाम, पौष्टिक भोजन और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने की सलाह दी है।
निजी अस्पतालों की लॉबी
श्रमिक नेता महेश पत्तार ने कहा कि सिजेरियन की बढ़ती संख्या के पीछे निजी अस्पतालों की लॉबी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका रहती है
पहली बार सिजेरियन से प्रसव होने पर आगे भी उसी पद्धति का सहारा लेना पड़ता है। बदली जीवनशैली, रोग-प्रतिरोधक क्षमता की कमी और कुपोषण भी बढ़ती संख्या के पीछे कारण हैं। सिजेरियन से अधिक रक्तस्राव, गर्भाशय फटने और नाज़ुक स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका रहती है, जबकि सामान्य प्रसव में ऐसे जोखिम कम होते हैं।
–डॉ. रामलिंगप्पा अंटरथानी, स्त्री रोग विशेषज्ञ, केएमसी-आरआई
धारवाड़ जिले में जन्म दर
वर्ष — कुल जन्म — प्राकृतिक — सीजेरियन
2020-21 — 32,436 — 20,651 — 11,785
2021-22 — 31,017 — 20,008 — 11,009
2022-23 — 32,447 — 19,343 — 13,104
2023-24 — 33,753 — 19,809 — 13,944
2024-25 — 31,687 — 17,148 — 14,539
2025-26 (जून तक) — 7,420 — 3,896 — 3,524
