जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
कर्नाटक में 24 लाख श्रमिकों की स्क्रीनिंग
27.7 प्रतिशत को लिवर रोग
बड़ी संख्या में हाई बीपी और मधुमेह
हुब्बल्ली. कर्नाटक में निर्माण क्षेत्र से जुड़े मजदूरों की स्वास्थ्य जांच में गंभीर चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। श्रम विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में 24 लाख निर्माण श्रमिकों की जांच की गई, जिसमें लगभग 27.7 प्रतिशत मजदूरों में यकृत (लिवर) से जुड़ी बीमारियां पाई गईं। इसके अलावा 27.1 प्रतिशत श्रमिक उच्च रक्तचाप और करीब 13.7 प्रतिशत (लगभग 3.34 लाख) मधुमेह से पीडि़त पाए गए।
32 लाख से अधिक मजदूर पंजीकृत
कर्नाटक भवन एवं अन्य निर्माण कर्मचारी कल्याण मंडल के अनुसार राज्य में 32 लाख से अधिक निर्माण मजदूर पंजीकृत हैं। इनमें प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, पेंटर, राजमिस्त्री और सहायक शामिल हैं। ‘प्रिवेंटिव हेल्थ केयर’ योजना के तहत 23 स्वास्थ्य मानकों पर जांच की गई।
लिवर रोग सबसे ज्यादा चिंता का कारण
कर्नाटक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक ईश्वर हस्सी ने बताया कि सामान्य आबादी की तुलना में निर्माण मजदूरों में लिवर रोग अधिक पाए जा रहे हैं। इसके पीछे अत्यधिक शराब सेवन, अस्वच्छ तरीके से टैटू बनवाना और असुरक्षित टीकाकरण जैसी वजहें प्रमुख हो सकती हैं, जो हेपेटाइटिस संक्रमण को बढ़ावा देती हैं।
7.34 लाख श्रमिकों को उपचार उपलब्ध कराया
अधिकारियों के अनुसार, जांच के बाद लगभग 7.34 लाख श्रमिकों को विभिन्न बीमारियों के लिए उपचार उपलब्ध कराया गया। मोबाइल हेल्थ यूनिट्स के जरिए निर्माण स्थलों पर ही रक्त परीक्षण और अन्य जांच की जा रही हैं, जबकि रिपोर्ट व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी जा रही है।
प्रवासी मजदूरों का ट्रैक रखना मुश्किल
लगातार काम की जगह बदलने के कारण प्रवासी मजदूरों का लंबी अवधि तक इलाज जारी रखना बड़ी चुनौती बन रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संतोष लाड ने कहा कि सभी मजदूरों को इलाज देना सरकार का उद्देश्य है, लेकिन उनके बार-बार स्थानांतरण से निगरानी कठिन हो जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों के आधार पर गहन शोध और दीर्घकालिक स्वास्थ्य नीति बनाना जरूरी है, ताकि मजदूर वर्ग को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके।
‘सार्वत्रिक स्वास्थ्य कार्ड’ की तैयारी
श्रमिक मंडल के सदस्य हों या नहीं, सभी को उपचार उपलब्ध कराना हमारा उद्देश्य है। प्रवासी श्रमिकों के लगातार स्थान बदलते रहने के कारण उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार जल्द ही ‘सार्वत्रिक स्वास्थ्य कार्ड’ लागू करने की योजना बना रही है, जिससे मजदूर कहीं भी उपचार प्राप्त कर सकेंगे।
–संतोष लाड, श्रम मंत्री
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