आईपीएस अधिकारियों पर उत्पीड़न के आरोप

खुलासा करने की मांग

नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय के पुलिस अधीक्षक ने पुलिस महानिदेशक को लिखा पत्र

उच्च स्तरीय बैठक में बोलने की अनुमति मांगी

बेंगलूरु. राज्य में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर अपने ही अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ कथित दुव्र्यवहार और भेदभाव के गंभीर आरोप सामने आए हैं। नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय के पुलिस अधीक्षक एस.एस. काशी ने इस संबंध में राज्य के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर पूरे मामले का खुलासा करने की अनुमति मांगी है।

वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप

अपने पत्र में पुलिस अधीक्षक एस.एस. काशी ने आरोप लगाया है कि सुधीर कुमार रेड्डी सहित कुछ भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ दर्प, भेदभाव और पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अन्य राज्यों से आए अधिकारी कर्नाटक संवर्ग के अधिकारियों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।

खुली बैठक में रखने की मांग

काशी ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अपनी बात रखने के लिए 18 से 29 अप्रेल के बीच 30 मिनट का समय देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे आईपीएस अधिकारियों के दुराचार और कार्यशैली का विस्तार से खुलासा करना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि काशी इसी महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

निदेशालय के भीतर भी शिकायतें

इस विवाद के बीच नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय के भीतर भी उत्पीडऩ के आरोप सामने आए हैं। पश्चिमी प्रभाग के निरीक्षक टी. आर. श्रीनिवास ने उप पुलिस अधीक्षक महेश्वरगौड़ा और पुलिस अधीक्षक करिबसनगौड़ा के खिलाफ 18 बिंदुओं वाली शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में एक वीडियो बयान भी जारी किया है।

पुलिस महानिदेशक से हस्तक्षेप की अपील

पुलिस अधीक्षक एस.एस. काशी ने एम.ए. सलीम (राज्य पुलिस महानिदेशक) से आग्रह किया है कि उन्हें इन मुद्दों को सार्वजनिक रूप से रखने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि पहले भी कुछ समस्याएं उठाई गई थीं, जिनमें से केवल 20 प्रतिशत का समाधान हुआ है, जबकि 80 प्रतिशत अब भी लंबित हैं।

बढ़ता विवाद, जांच की मांग

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग के भीतर कार्यसंस्कृति और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाते हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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