हुब्बल्ली. श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, हुब्बल्ली के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन में मुनि नवीनप्रज्ञ ने कहा कि मनुष्य के जीवन का वास्तविक फल केवल मन की एकाग्रता से ही प्राप्त किया जा सकता है।
मुनि ने उदाहरण देते हुए कहा कि सूर्य एक है, परन्तु उसकी किरणें अनेक हैं; फूल एक है, परन्तु उसकी पंखुडिय़ां अनेक हैं; मकान एक है, परन्तु खिडिक़या अनेक हैं। उसी प्रकार मनुष्य एक है, परन्तु उसके चित्त अनेक दिशाओं में भटकते रहते हैं। मन को रोका नहीं जा सकता, परन्तु सही दिशा में लगाकर उसकी चंचलता को नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आग्रह, विवाद और पूर्वाग्रह से दूर रहना चाहिए। निंदा करने के बजाय आत्मचिंतन करना चाहिए। व्यक्ति को सोचना चाहिए मैंने क्या किया है और आगे क्या करना है। स्वयं को जानना सबसे कठिन कार्य है, परन्तु यही साधना का वास्तविक मार्ग है। मन पुद्गल से निर्मित है, इसलिए उसे गलत दिशा में जाने से रोकना आवश्यक है।
प्रवचन की शुरुआत जागृतमुनि ने की। इस अवसर पर उदयपुर और होसपेट से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन-वंदन और प्रवचन का लाभ लिया।
संघ के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य विजयराज के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में क्विज टाइम प्रतियोगिता व प्रश्न मंच, एक माह तक चलने वाला वर्णमाला रसनाविजय तप तथा 7 अक्टूबर को सुख विपाक सूत्र पर ओपन बुक परीक्षा आयोजित की जाएगी।
संघ ने सभी सदस्यों से प्रवचन और आगामी कार्यक्रमों में अधिक से अधिक भाग लेने का आह्वान किया है।
कार्यक्रम का संचालन सह मंत्री महेंद्र विनायिकिया ने किया। यह जानकारी संघ के मंत्री प्रकाश कटारिया ने दी।
