212 रुपए प्रति टन रॉयल्टी का समझौता
15 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी, गोदाम का भी होगा जीर्णोद्धार
कारवार। कारवार वाणिज्यिक बंदरगाह की जेट्टी के एक हिस्से के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी अब निजी कंपनी को सौंपी गई है। कर्नाटक समुद्री परिवहन बोर्ड (केएमबी) ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत एसपीएम लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन लिमिटेड के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
निजी कंपनी ने निविदा प्रक्रिया में प्रति टन माल पर 212 रुपए रॉयल्टी देने की बोली लगाकर रिकॉर्ड बनाया है। केएमबी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह वाणिज्यिक बंदरगाह की जेट्टी के संचालन के लिए भुगतान की जाने वाली ऊंची रॉयल्टी में से एक है।
15 साल की जिम्मेदारी
समझौते के अनुसार कंपनी को अगले 15 वर्षों तक जेट्टी के आवंटित हिस्से का रखरखाव करना होगा। बंदरगाह में होने वाले प्रत्येक टन माल के कारोबार पर 212 रुपए के हिसाब से केएमबी को रॉयल्टी देनी होगी।
कंपनी को केवल जेट्टी का रखरखाव ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े गोदाम की मरम्मत और आवश्यक सुविधाओं का विकास भी करना होगा। वाणिज्यिक बंदरगाह की कुल 375 मीटर लंबी जेट्टी में से 150 मीटर हिस्सा और गोदाम कंपनी को सौंपा गया है।
जर्जर गोदाम बड़ी चुनौती
बंदरगाह के गोदाम की दीवारें खराब स्थिति में हैं और छत भी क्षतिग्रस्त है। जेट्टी की मरम्मत, गोदाम के पुनर्निर्माण और अतिरिक्त सुविधाओं के विकास पर कंपनी को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
बंदरगाह में गुड़ (मोलासिस) और अयस्क के निर्यात में कमी तथा खाद्य सामग्री के आयात में ठहराव और बिटुमिन आयात घटने से राजस्व प्रभावित हुआ है। वर्तमान में बंदरगाह की औसत वार्षिक आय करीब 11 से 15 करोड़ रुपए बताई गई है। समझौते के बाद निजी कंपनी ने सालाना करीब 26.5 करोड़ रुपए राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है।
समझौते पर हस्ताक्षर
बेंगलूरु में हुए अंतिम समझौते पर केएमबी के सीईओ बालचंद्र एच.सी. और कंपनी के निदेशक विकरम विश्वनाथ ने हस्ताक्षर किए। केएमबी के कार्यकारी अभियंता टी.एस. राठौड़ के अनुसार समझौता हो चुका है, जबकि जेट्टी का वास्तविक हस्तांतरण अभी किया जाना बाकी है।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

