दो मजदूरों की जान लेने के बाद पकड़ा गया था हाथी
इलाज में लापरवाही के आरोप, जांच की मांग
शिवमोग्गा। चिक्कमगलूरु जिले के बालेहोन्नूर क्षेत्र में दो बागान मजदूरों की मौत का कारण बने जंगली हाथी ‘शौर्य’ की सक्रेबैलु हाथी शिविर में बीमारी के चलते मौत हो गई। वन विभाग ने मौत का वास्तविक कारण जानने के लिए शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही है।
फरवरी 2026 में शौर्य ने बालेहोन्नूर के ह्यारंबीपुर में एक कॉफी बागान में हमला कर हावेरी निवासी यल्लप्पा की जान ले ली थी। सात दिन बाद इसी बागान में काम कर रही होसपेट निवासी 34 वर्षीय बोरम्मा भी हाथी के हमले में मारी गई थीं। लगातार दो मौतों के बाद वन विभाग ने सात प्रशिक्षित हाथियों और 75 से अधिक कर्मचारियों की मदद से अभियान चलाकर शौर्य को बेहोशी की दवा देकर पकड़ लिया था।
तीन महीने में बना प्रशिक्षित हाथी
शौर्य को सक्रेबैलु शिविर लाकर लकड़ी के क्रॉल में रखा गया। महावतों और कावाडिय़ों के करीब तीन महीने के प्रयास के बाद उसे प्रशिक्षित किया गया और मई में क्रॉल से बाहर निकाला गया।
इलाज को लेकर उठे सवाल
शौर्य की मौत के बाद वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि क्रॉल में रहने के दौरान उसके शरीर पर गंभीर चोटें थीं और उसे समय पर विशेषज्ञ उपचार मिला या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। उपचार के दस्तावेज सार्वजनिक करने तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करने की मांग भी उठी है।
वन विभाग के अधिकारियों ने शिविर का दौरा किया है। मौत का सटीक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

