471 आरओ प्लांट में से 127 पूरी तरह जर्जर
मरम्मत के लिए चाहिए 4 करोड़ रुपए
यादगीर. लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलेभर में स्थापित किए गए आरओ आधारित शुद्ध पेयजल संयंत्रों में से बड़ी संख्या अब खराब होकर बेकार पड़ी है। कई संयंत्र ऐसे हैं जो मरम्मत से परे हो चुके हैं और उनमें जंग लग चुकी है।
ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, कर्नाटक ग्रामीण अवसंरचना विकास निगम (केआरआईडीएल), कल्याण कर्नाटक क्षेत्र विकास मंडल, सहकारी संस्थाओं और अन्य संगठनों की सहायता से जिले में कुल 471 आरओ जल शुद्धिकरण इकाइयां स्थापित की गई थीं।
219 संयंत्र खराब, 92 की मरम्मत
इन 471 आरओ इकाइयों में से 219 संयंत्र रखरखाव के अभाव में खराब हो गए थे। इनमें से 92 संयंत्रों की मरम्मत 50 हजार से 1.50 लाख रुपए खर्च कर कराई गई है। जबकि शेष 127 संयंत्र इतने खराब हो चुके हैं कि उन्हें ठीक करना लगभग असंभव माना जा रहा है।
विभागीय इंजीनियरों के अनुसार कई मशीनों में जंग लग चुकी है और लंबे समय से बंद पड़े रहने के कारण उनकी हालत अत्यंत खराब हो गई है।
सरकार से मांगा गया अतिरिक्त अनुदान
ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष राज्य सरकार ने गर्मी के दौरान पेयजल व्यवस्था के लिए जिले को 1.20 करोड़ रुपए जारी किए थे। इस राशि से अत्यंत जरूरी और कम खर्च वाले आरओ संयंत्रों की मरम्मत कर लोगों को पानी उपलब्ध कराया गया।
अधिकारियों ने बताया कि जो संयंत्र लंबे समय से बंद पड़े थे और जिनकी मरम्मत पर अत्यधिक खर्च आना था, उन्हें फिलहाल ठीक नहीं किया गया। लोकायुक्त ने भी खराब पड़े आरओ प्लांटों की जानकारी मांगी है और विभाग गांववार आंकड़े एकत्र कर रहा है।
नाम के लिए हैं शुद्ध पानी केंद्र
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में हाल ही में लगाए गए नए आरओ संयंत्र तो ठीक तरह काम कर रहे हैं, लेकिन पुराने संयंत्रों की देखरेख पूरी तरह विफल रही है। कई जगह केवल नाम के लिए जल शुद्धिकरण केंद्र बने हुए हैं, जबकि वहां साफ पानी उपलब्ध नहीं हो रहा।
कुछ संयंत्र उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद बंद हो गए, जबकि कई जगह जलस्रोत की कमी और ग्राम पंचायतों की लापरवाही के कारण मशीनें निष्क्रिय हो गईं। लोगों का कहना है कि अब अधिकारी मरम्मत के लिए बजट नहीं होने का बहाना बना रहे हैं।
मरम्मत पर आएगा 4 करोड़ खर्च
ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रभारी कार्यकारी अभियंता हणमंतराय पाटील ने बताया कि पिछले कई वर्षों से खराब पड़े 127 आरओ संयंत्रों की मरम्मत के लिए लगभग 4 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। अधिकांश संयंत्रों की मरम्मत पर 1.50 लाख रुपए से अधिक खर्च आने का अनुमान है।
उन्होंने बताया कि कई संयंत्र इतने खराब हो चुके हैं कि उनकी मरम्मत की बजाय नए संयंत्र स्थापित करना अधिक उचित होगा। इसके बावजूद मरम्मत के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
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