हरियाली बढ़ाने की मुहिम तेज, इस वर्ष 2.85 लाख पौधे तैयारहत्तीकुणी सडक़ किनारे रोपे गए पौधे।

यादगीर में सडक़ किनारे, गोचर और सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान

यादगीर. जिले में हरित क्षेत्र के विस्तार के लिए वन विभाग ने इस वर्ष 2.85 लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मानसून की शुरुआत के साथ ही सडक़ किनारे, गोचर (गोमाल) और सरकारी भूमि पर पौधरोपण अभियान तेज कर दिया गया है। वहीं, वितरण के लिए तैयार लाखों पौधे नर्सरियों में लहलहा रहे हैं।

जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 6.54 प्रतिशत यानी 33,773 हेक्टेयर क्षेत्र वनाच्छादित है। इसके अलावा 11,755 हेक्टेयर स्थायी गोमाल और 772 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्ष एवं उपवन फैले हुए हैं। वन क्षेत्र का विस्तार करने के लिए नीम, बरगद, महोगनी और करंज सहित कई प्रजातियों के पौधे तैयार किए गए हैं।

सडक़ों के दोनों ओर लगाए जा रहे पौधे

विभाग की ओर से सैदापुर-तावूर, हत्तीकुणी-बंदल्ली, कडेचूर-सौराष्ट्रहल्ली तथा राचनहल्ली गेट-कडेचूर मार्ग के दोनों ओर 900-900 पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा एपीएमसी परिसर, डिग्री कॉलेज, सर्किट हाउस रोड स्थित सरकारी विद्यालय मैदान और नगर परिषद को भी कुल 1,800 पौधे उपलब्ध कराए गए हैं।

बारिश कम होने पर टैंकर से सिंचाई

पिछले कुछ सप्ताह से बारिश कम होने के कारण नवरोपित पौधों को ट्रैक्टरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वन रक्षक पौधों के चारों ओर कांटेदार झाडिय़ां लगाकर उन्हें पशुओं से भी सुरक्षित कर रहे हैं।

एक पौधे पर 800 रुपए तक खर्च

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बीज से लेकर 14 से 20 माह तक नर्सरी में पौधे तैयार करने, गड्ढे खोदकर रोपण करने और तीन वर्षों तक उनकी देखभाल करने पर प्रति पौधा लगभग 800 रुपए का खर्च आता है। इसके बावजूद औसतन 75 प्रतिशत पौधे ही जीवित रह पाते हैं, जबकि पर्यावरण के प्रति जागरूक क्षेत्रों में यह अनुपात 90 से 95 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

किसानों को एक लाख पौधों का वितरण

उप वन संरक्षण अधिकारी एबी पाटील ने बताया कि विभाग 1.85 लाख पौधों का रोपण करेगा, जबकि किसानों को उपयोगी प्रजातियों के एक लाख पौधे वितरित किए जाएंगे। पौधों की सुरक्षा के लिए चौकीदारों की नियुक्ति और पशु-रोधी खाइयों का निर्माण भी किया जाएगा।

किसानों और पशुओं से भी चुनौती

वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि कुछ स्थानों पर किसान छाया पडऩे की आशंका से पौधों की जड़ों या टहनियों को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं, बकरियां और अन्य पशु भी पौधों की पत्तियां खाकर उनके विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं।

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By Bharat Ki Awaz

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