संरक्षण बना बड़ी चुनौती
वक्फ संपत्तियों जैसी स्थिति, 40 हजार एकड़ भूमि पर कब्जा
‘भू वराह’ योजना से बचाव की पहल
शिवमोग्गा. कर्नाटक में मंदिरों की संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है, जिससे सरकार के सामने इन संपत्तियों के संरक्षण की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। मुजराई एवं धार्मिक दत्तक विभाग के अंतर्गत आने वाले हजारों मंदिरों की जमीन पर अवैध कब्जा और अनियमित हस्तांतरण की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
दशकों की लापरवाही बनी कारण
राजाओं के समय मंदिरों को दान और इनाम के रूप में बड़ी मात्रा में भूमि दी गई थी। लेकिन स्वतंत्रता के बाद ये संपत्तियां मुजराई विभाग के अंतर्गत तो आ गईं, परंतु इनके नाम पर विधिवत रिकॉर्ड तैयार नहीं किए गए। इसी कमी का फायदा उठाकर लाखों एकड़ जमीन पर अतिक्रमण और अवैध बिक्री हुई।
40 हजार एकड़ भूमि पर कब्जा
सरकारी सर्वे (2020) के अनुसार, राज्य में मंदिरों की करीब 40 हजार एकड़ भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई है। अब तक 7125 मंदिरों की 17,202.02 एकड़ भूमि का सर्वे और रिकॉर्ड तैयार किया गया है, जबकि 27,441 मंदिरों की संपत्तियों का काम अभी बाकी है।
छोटे मंदिरों की हालत गंभीर
राज्य में कुल 34,566 मंदिर मुजराई विभाग के अंतर्गत हैं। इनमें सी श्रेणी के 34,168 मंदिर ऐसे हैं, जिन्हें पर्याप्त आय नहीं होने के कारण सरकार से सालाना मात्र 72,000 रुपए की सहायता मिलती है। जमीन के अभाव में इन मंदिरों की दैनिक पूजा तक सरकारी अनुदान पर निर्भर हो गई है।
‘भू वराह’ योजना से समाधान की कोशिश
सरकार ने मंदिर संपत्तियों की सुरक्षा के लिए ‘भू वराह’ योजना लागू की है, जिसके तहत भूमि का मापन, दस्तावेजीकरण और सुरक्षा के लिए बाड़बंदी या कंपाउंड निर्माण किया जाएगा। इसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
यह योजना बेंगलूरु, उडुपी, दक्षिण कन्नड़, दावणगेरे सहित कई जिलों में लागू की जा रही है।
अतिक्रमण हटाने में कई बाधाएं
मंदिर भूमि को पुन: प्राप्त करने में कई कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही हैं, जैसे भूमि का मंदिर के नाम पर रिकॉर्ड नहीं होना, कृषि सुधार कानूनों के तहत निजी नामांतरण, सरकारी व वन भूमि से जुड़े विवाद, संयुक्त खातों और रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आ रही हैं।
अतिक्रमण हटाने के जिला प्रशासन को दिए निर्देश
राज्य के मंत्री रामलिंगारेड्डी ने कहा कि मंदिरों की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं। कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार बैठकें की जा रही हैं।
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