सुख की खोज अपने स्वभाव से करेंसाध्वी भव्यगुणा के दर्शन करते श्रावक-श्राविकाएं।

जीवन, संयोग और आत्म-साक्षात्कार पर साध्वी का मार्गदर्शन

दावणगेरे. सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय शंखेश्वर पाश्र्व राजेन्द्र सूरि गुरुमंदिर संघ काईपेट में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी भव्यगुणा ने जीवन, मृत्यु और संयोग पर गहन विचार साझा किए।

साध्वी ने कहा कि आयु समाप्त होने पर जीव कहां जाता है और किस दिशा या परिवार से जुड़ा है, यह अनिश्चित है। जीवन में हम अनेक स्वजनों के साथ रहते हैं, परन्तु उनका फिर से मिलना कठिन है, जैसे समुद्र में गिरा मोती।

साध्वी ने मोह से मुक्त होने और असंयोगी परमात्मा पर ध्यान केंद्रित करने का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि संयोगों से अलिप्त रहने की कला कठिन लेकिन असंभव नहीं है। सुख की खोज बाहर से नहीं, अपने स्वभाव से करनी चाहिए।

साध्वी शीतलगुणा ने जीवन में दूसरों की मदद और दयालुता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सभी के जीवन में तूफान समान हैं, चाहे नाव बड़ी हो या छोटी, इसलिए एक-दूसरे का सहयोग करना जीवन का सार और सुख का आधार है।

राजु भंडारी ने बताया कि साध्वीवृंद के सानिध्य में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर सौभाग्य एकासना का मंगलमय आयोजन हुआ। भिवंडी (महाराष्ट्र) से कांतिलाल, पूनम, नेल्लोर से दुर्गेश जैन, मुंबई से संगीतकार राजेश जैन और बेंगलूरु से गुरुभक्तों का संघ की ओर से सम्मान किया गया। शंखेश्वर पाश्र्व राजेन्द्र गुरुमंदिर संघ एवं ट्रस्ट मंडल ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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