72 हजार करोड़ की परियोजना के लिए सालाना केवल 3 हजार करोड़ का प्रावधान, तीन वर्ष का लक्ष्य अधर में
हुब्बल्ली. उत्तर कर्नाटक की महत्वाकांक्षी कृष्णा अपर परियोजना-3 (यूकेपी-3) भूमि अधिग्रहण के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं मिलने से धीमी पड़ गई है। लगभग 72 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 में केवल 3 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जबकि निर्धारित समय में कार्य पूरा करने के लिए प्रतिवर्ष कम से कम 20 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता बताई जा रही है।
आलमट्टी बांध की ऊंचाई 519.60 मीटर से बढ़ाकर 524.256 मीटर करने की इस परियोजना के तहत डूब क्षेत्र और नहर निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया जाना है। सरकार ने तीन वर्षों में अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक कुल अनुमानित राशि का लगभग तीन प्रतिशत ही जारी हो पाया है। पिछले वित्तीय वर्ष में 1,750 करोड़ रुपए जारी किए गए थे, जबकि चालू वर्ष की पहली तिमाही में 600 से 750 करोड़ रुपए ही उपलब्ध कराए गए हैं।
सरकार ने सिंचित भूमि के लिए 40 लाख रुपए प्रति एकड़ तथा सूखी भूमि के लिए 30 लाख रुपए प्रति एकड़ मुआवजा तय किया है। हालांकि संसाधनों की कमी के कारण भुगतान की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
3,000 करोड़ रुपए का प्रावधान
चालू वर्ष के लिए 3,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है तथा अनुपूरक बजट में अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाएगी। साथ ही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री से भी अधिक वित्तीय सहायता का अनुरोध किया जाएगा।
–रामलिंगा रेड्डी, जल संसाधन मंत्री
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

