मंत्री का दफ्तर, लेकिन फीता कार्यकर्ताओं ने काटा!कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए मंत्री के.एस. बसवंतप्पा।

सादगी की मिसाल बने मंत्री के.एस. बसवंतप्पा; कार्यकर्ता रहे आगे, खुद पीछे खड़े होकर दिया ‘अधिकार नहीं, कार्यकर्ताओं की मेहनत’ का संदेश

दावणगेरे। राजनीति में पद मिलते ही नेता कार्यक्रमों के केंद्र में नजर आते हैं। मंच पर मंत्री, आसपास अधिकारी और पीछे कार्यकर्ता—आमतौर पर तस्वीर कुछ ऐसी ही होती है। लेकिन दावणगेरे में सोमवार को इसका उलटा नजारा देखने को मिला। मुजराई, मत्स्यपालन, बंदरगाह और अंतर्देशीय जल परिवहन मंत्री के.एस. बसवंतप्पा ने अपने नए कार्यालय का उद्घाटन खुद करने के बजाय कार्यकर्ताओं के हाथों करवाया और स्वयं पीछे खड़े रहे।

गौरी-गणेश पर्व के शुभ अवसर पर शहर के लोक निर्माण विभाग कार्यालय परिसर में मंत्री के नए कार्यालय का उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम की खासियत कार्यालय का शुभारंभ नहीं, बल्कि जिस अंदाज में यह हुआ, वह रही।

आगे कार्यकर्ता, पीछे मंत्री

आमतौर पर कार्यालय उद्घाटन में पुरोहित, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ नेता या अधिकारी प्रमुख भूमिका में रहते हैं। लेकिन बसवंतप्पा ने इस परंपरा से अलग हटकर पार्टी कार्यकर्ताओं को ही पूजा और उद्घाटन की जिम्मेदारी दी।

कार्यकर्ता पूजा-अर्चना कर कार्यालय का उद्घाटन कर रहे थे, जबकि मंत्री सामान्य कार्यकर्ताओं के बीच खड़े रहे। उन्होंने किसी विशेष प्रोटोकॉल या दिखावे को प्राथमिकता नहीं दी।

उनका यह अंदाज इस संदेश के रूप में देखा गया कि कार्यकर्ता ही मेरी ताकत हैं और उनकी मेहनत व समर्थन से ही मुझे यह जिम्मेदारी मिली है।

सत्ता में रहकर भी कार्यकर्ताओं को केंद्र में रखा

राजनीति में अक्सर यह शिकायत सुनने को मिलती है कि सत्ता मिलने के बाद नेता कार्यकर्ताओं से दूर हो जाते हैं और उनका दायरा अधिकारियों व चुनिंदा लोगों तक सीमित हो जाता है। ऐसे माहौल में बसवंतप्पा का यह कदम अलग संदेश देता नजर आया।

कार्यालय का उद्घाटन कार्यकर्ताओं से करवाकर उन्होंने कार्यकर्ताओं के योगदान को सम्मान देने, आम लोगों के बीच सहज रहने और सत्ता के प्रदर्शन से दूरी बनाए रखने का संदेश दिया।

मंत्री का यह अंदाज कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। उद्घाटन समारोह ने यह सवाल भी सामने रखा कि क्या सत्ता का मतलब सिर्फ पद और प्रोटोकॉल है, या उस कार्यकर्ता को सम्मान देना भी है, जिसकी मेहनत से नेता सत्ता तक पहुंचता है? बसवंतप्पा के इस कदम ने कम से कम इस सवाल का जवाब अपने तरीके से जरूर दिया।

 

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By Bharat Ki Awaz

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