मंत्री बोले- ‘मुझे उनसे सीखने की जरूरत नहीं’
स्वामी ने भी पोस्ट के जरिए दिया परोक्ष जवाब
बागलकोट। मंत्री विजयानंद काशप्पनवर और कूडलसंगम पंचमसाली पीठ के जगद्गुरु बसवजय मृत्युंजय स्वामी के बीच जुबानी जंग दूसरे दिन भी जारी रही। काशप्पनवर ने स्वामी पर तीखा हमला बोला, वहीं स्वामी ने अपने वाट्सऐप स्टेटस के जरिए ‘सत्ता शाश्वत नहीं होती’ का संदेश देते हुए परोक्ष रूप से जवाब दिया।
पत्रकारों से बातचीत में काशप्पनवर ने कहा कि उन्हें स्वामी से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है। गुरु का पद संभालने वाले व्यक्ति को छोटी सोच से ऊपर उठकर सभी भक्तों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी को पीठ पर बैठाने वालों का सम्मान बनाए रखना चाहिए।
काशप्पनवर ने कहा कि उनके खिलाफ विजयपुर में एक शिकायत लंबित है और स्वाम को पहले उसका जवाब जनता के सामने देना चाहिए। मैं इनके आने के बाद राजनीति में नहीं आया हूं। हम करीब 50 वर्षों से राजनीति में हैं। इनसे राजनीतिक सीख लेने की स्थिति हमारी नहीं है।
बीडदी आंदोलन पर भी साधा निशाना
बीडदी आंदोलन के संबंध में काशप्पनवर ने कहा कि इसकी अधिसूचना तत्कालीन मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के कार्यकाल में जारी हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जमीन खोने के डर से नाटक किया जा रहा है। किसानों की सहमति होने के बाद इस मामले में स्वामी की भूमिका पर भी उन्होंने सवाल उठाया।
‘गुस्सा कम करें तो मुख्यमंत्री बनेंगे’
इस बीच सिद्धनकोल्ला के डॉ. शिवकुमार स्वामी का काशप्पनवर के साथ बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें स्वामी काशप्पनवर के प्रति समर्थन जताते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्हें क्षेत्र के आशीर्वाद से मंत्री पद मिला है और यदि वे अपना गुस्सा थोड़ा कम कर लें तो मुख्यमंत्री भी बन सकते हैं। उन्होंने काशप्पनवर को धैर्य बनाए रखने की सलाह भी दी।
‘मैं मंत्री बन गया, अब क्या करोगे जगद्गुरु?’
अपने गृह क्षेत्र हुनगुंद तालुक के हावरगी गांव में आयोजित स्वागत एवं सम्मान समारोह में काशप्पनवर ने जगद्गुरु बसवजय मृत्युंजय स्वामी पर और तीखा हमला किया। उन्होंने दावा किया कि जगद्गुरु ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से उन्हें मंत्री न बनाने का आग्रह किया था। काशप्पनवर के अनुसार, मुख्यमंत्री ने इसके विपरीत उन्हें मंत्री पद दिया और कहा कि इसी वजह से उन्हें मंत्री बनाया जा रहा है।
काशप्पनवर ने स्वामी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि “मैं मंत्री बन गया हूं, अब क्या करोगे जगद्गुरु?”
उन्होंने कहा कि समाज ने जिस सम्मान और पद की जिम्मेदारी दी है, उसके अनुरूप आचरण करना चाहिए। उन्होंने स्वामी के उस कथित संकल्प पर भी सवाल उठाया कि कांग्रेस सरकार रहने तक वे किसी मुख्यमंत्री के घर नहीं जाएंगे। काशप्पनवर ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में संयम और जिम्मेदारी जरूरी है तथा किसी के खिलाफ कितने भी लोग खड़े हों, धैर्य बनाए रखना चाहिए।
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