कस्तूरीरंगन रिपोर्ट से अंडारू-मुट्लुपाड़ी के ग्रामीणों में बढ़ी चिंताहेब्री तालुक के अंडारू और मुट्लुपाड़ी गांव।

वन और वन्यजीव बचाएं, जंगल की सीमा पर बसे लोगों का जीवन भी सुरक्षित रहे

अजेकारू (उडुपी)। पश्चिमी घाट क्षेत्र में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट लागू करने की चर्चा फिर तेज होने से हेब्री तालुक के अंडारू और मुट्लुपाड़ी गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सरकार को जंगल बचाने के साथ जंगल की सीमा पर पीढिय़ों से रह रहे लोगों के जीवन और आजीविका की भी चिंता करनी चाहिए।

ग्रामीणों के अनुसार, कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान की योजना लागू होने के बाद से सडक़, घर, बिजली और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में कई बाधाएं सामने आई हैं। अब कस्तूरीरंगन रिपोर्ट लागू होने पर कृषि, मकान निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर नए प्रतिबंध लगने की आशंका है।

अंडारू गांव के 12 परिवार पहले ही सरकारी मुआवजा लेकर दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आजीविका मुख्यत: कृषि और बागवानी पर निर्भर है। इसलिए नई पर्यावरणीय पाबंदियों से उनका जीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए।

गांव में सडक़ और सार्वजनिक परिवहन की भी गंभीर कमी है। अंडारू से हेब्री और पंचायत कार्यालय तक जाने के लिए बेहतर सडक़ नहीं है तथा बस सेवा भी उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों ने विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी बस सेवा शुरू करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय लोगों की राय ली जाए और उनकी आशंकाएं दूर की जाएं। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण में पूरा सहयोग रहेगा, लेकिन कृषि और जीवन-यापन की कीमत पर कोई योजना स्वीकार नहीं होगी।

 

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By Bharat Ki Awaz

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