मेंगलूरु में भारत का संभावित डेटा सेंटर हबमेंगलूरु समुद्र तट।

केडीईएम-सिलिकॉन बीच-डेलॉयट की संयुक्त रिपोर्ट सरकार को सौंपी

करावली क्षेत्र की विशेषताओं पर जोर

मेंगलूरु. कर्नाटक के डिजिटल क्षेत्र की रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कर्नाटक डिजिटल इकॉनमी मिशन (केडीईएम), सिलिकॉन बीच कार्यक्रम (एसबीपी) और डेलॉयट ने संयुक्त रूप से “आज का मेंगलूरु: भारत का संभावित डेटा सेंटर हब” शीर्षक से कार्य व्यवहार्यता रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत की है।

यह रिपोर्ट बेंगलूरु टेक शिखर सम्मेलन 2025 के दौरान आयोजित डेटा सेंटर गोलमेज बैठक में आईटी-बीटी मंत्री प्रियांक खरगे और विभागीय सचिव एन. मंजुला को औपचारिक रूप से सौंपी गई।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

रिपोर्ट में कहा गया है कि करावली (तटीय) क्षेत्र की भौगोलिक सुविधाएं, प्रतिस्पर्धी भूमि और ऊर्जा लागत, बढ़ती जीसीसी गतिविधियां, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विस्तार, संभावित समुद्र-तल केबल लैंडिंग स्टेशन और हरित ऊर्जा—सभी मिलकर मेंगलूरु को डेटा सेंटर हब बनाने में सहायक हैं।

मॉडल बन सकता है

कर्नाटक हमेशा तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी रहा है। एआई, डेटा प्रभुत्व और क्लाउड अपनाने के इस दौर में मेंगलूरु डिजिटल आधारभूत संरचना का मॉडल बन सकता है।
बी.वी. नायडू, अध्यक्ष, केडीईएम

भारत का अगला बड़ा अवसर

मेंगलूरु अब केवल उभरता हुआ शहर नहीं, बल्कि भारत का अगला बड़ा अवसर है।
रोहित भट्ट, संस्थापक सदस्य, सिलिकॉन बीच कार्यक्रम

भविष्य की संभावनाएं

मेंगलूरु-उडुपी करावली क्षेत्र में दीर्घकालीन डिजिटल और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग, संचालन और एआई क्षेत्र में नए रोजगार सृजित होंगे।
कर्नाटक को डेटा सेक्टर में राष्ट्रीय नेतृत्व की स्थिति प्राप्त होगी।

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