वीबी-जी रामजी योजना में 90:10 वित्तीय हिस्सेदारी बहाल करने की मांग, मनरेगा में बदलाव पर जताई चिंता
दावणगेरे. ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने कहा कि केंद्र सरकार की नई विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (वीबी-जी रामजी) योजना से राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। केंद्र को पहले की तरह 90:10 की वित्तीय भागीदारी व्यवस्था बहाल करनी चाहिए। इस संबंध में गुरुवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार अपना रुख स्पष्ट कर अधिसूचना जारी कर सकती है।
मनरेगा में बदलाव पर आपत्ति
जिला पंचायत के एस.एस. मल्लिकार्जुन सभागार में प्रगति समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए खंड्रे ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में मनरेगा के तहत राज्य में लगभग 61 हजार करोड़ रुपए खर्च कर 182 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए, जिससे लाखों ग्रामीणों को रोजगार और हजारों विकास कार्यों को गति मिली।
उन्होंने कहा कि नई योजना में केंद्र-राज्य की वित्तीय भागीदारी 90:10 से बदलकर 60:40 कर दी गई है। पहले मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र वहन करता था और सामग्री लागत में केंद्र का हिस्सा 75 प्रतिशत तथा राज्य का 25 प्रतिशत था। नई व्यवस्था के कारण कर्नाटक को इस वर्ष आवंटित 5,509 करोड़ रुपए के अतिरिक्त राज्य सरकार को लगभग 3,200 करोड़ रुपए अपनी ओर से खर्च करने पड़ेंगे।
रोजगार पर पड़ सकता है असर
खंड्रे ने कहा कि फसल कटाई (सुग्गी) के दौरान 60 दिनों तक रोजगार गारंटी कार्यों पर रोक लगाना अव्यावहारिक निर्णय है। इससे ग्रामीण श्रमिकों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मनरेगा के तहत पहले स्वीकृत 267 प्रकार के कार्यों में से अब केवल 160 कार्य ही जारी रखे गए हैं, जबकि 107 कार्य समाप्त कर दिए गए हैं। उन्होंने किसानों को लाभ पहुंचाने वाले व्यक्तिगत एवं कृषि आधारित कार्यों को दोबारा योजना में शामिल करने की मांग की।
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