नए विश्वविद्यालयों और स्किल-आधारित कोर्स की बढ़ती मांग का असर
उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण शुरू करने की तैयारी
हुब्बल्ली. कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। स्थिति यह है कि कई विभागों में आधी सीटें तक खाली रह जा रही हैं, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है।
तीन वर्षों में लगातार गिरावट
विश्वविद्यालय परिसर में कुल 51 पीजी विभाग संचालित हैं। वर्ष 2023-24 में 3,623 छात्रों ने प्रवेश लिया था, जो 2024-25 में घटकर 3,334 और 2025-26 में 3,058 रह गया।
‘संस्कृत’ और ‘विदेशी भाषाएं’ जैसे विभागों में छात्रों की संख्या काफी कम है, जबकि ‘एमबीए’, ‘गणित’ और ‘वाणिज्य’ में सभी सीटें भर गई हैं।
नए विश्वविद्यालय बने बड़ी वजह
शिक्षकों के अनुसार, पहले उत्तर कर्नाटक के छात्रों के लिए यही प्रमुख विकल्प था, लेकिन अब हावेरी और दावणगेरे जैसे जिलों में नए विश्वविद्यालय खुलने से छात्र स्थानीय स्तर पर ही दाखिला ले रहे हैं। इसके अलावा, डिग्री कॉलेजों में भी पीजी कोर्स उपलब्ध होने से विश्वविद्यालय की ओर रुझान कम हुआ है।
शिक्षकों की कमी भी जिम्मेदार
एक प्राध्यापक ने बताया कि विश्वविद्यालय में करीब 70 प्रतिशत शिक्षकीय पद खाली हैं। कुछ विभाग ऐसे भी हैं, जहां एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। इस कारण शैक्षणिक गुणवत्ता और आकर्षण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
समाजकार्य विभाग की प्रोफेसर संगीता माने के अनुसार, पहले इस कोर्स के लिए 1,000 से अधिक आवेदन आते थे, अब यह संख्या घटकर 150-200 रह गई है।
पारंपरिक कोर्स से दूरी, स्किल कोर्स की मांग बढ़ी
छात्र अब पारंपरिक पीजी कोर्स के बजाय कौशल-आधारित (स्किल) और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं, जबकि कुछ पार्ट-टाइम काम कर रहे हैं। सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया धीमी होने का असर भी देखने को मिल रहा है।
कॉलेजों में पीजी प्रवेश बढ़े
जहां विश्वविद्यालय में दाखिले घटे हैं, वहीं उससे संबद्ध डिग्री कॉलेजों में पीजी कोर्स में प्रवेश बढ़ा है। 2023-24 में 3,768, 2024-25 में 3,950 और 2025-26 में 4,609 छात्रों ने दाखिला लिया है।
सुधार के लिए नई पहल
कुलपति प्रो. एम.ए. खान ने बताया कि इस वर्ष से चौथे सेमेस्टर के छात्रों के लिए ‘इंडस्ट्री ओरिएंटेशन’ प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। इसके लिए बेंगलूरु की फ्यूचर माइंड टेक्नोलॉजीज के साथ समझौते की तैयारी है।
उन्होंने कहा कि सभी पीजी पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), संचार कौशल और कंप्यूटर शिक्षा को शामिल किया जाएगा, ताकि छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाई जा सके।
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