कोप्पल की धरती पर बोया गया शिक्षा का बीज बना ज्ञान का विशाल वटवृक्ष
कोप्पल. शिक्षा, संस्कार और सामाजिक उत्थान का पर्याय बन चुकी श्री गविशिद्धेश्वर शिक्षण संस्था (एसजीवीवी ट्रस्ट) आज अपनी गौरवशाली यात्रा के 75वें वर्ष की ओर बढ़ते हुए वज्र (हीरक) महोत्सव की दहलीज पर खड़ी है। वर्ष 1951 में एक छोटे से प्रयास के रूप में आरंभ हुई यह संस्था आज लाखों विद्यार्थियों के जीवन को आलोकित करने वाली ज्ञानगंगा बन चुकी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से शिक्षा जागरण तक
स्वतंत्रता पूर्व काल में कोप्पल क्षेत्र तत्कालीन हैदराबाद निजामशाही प्रशासन से जुड़ा हुआ था। सीमावर्ती क्षेत्र होने तथा बहुभाषी सामाजिक संरचना के कारण यहां शिक्षा एवं अन्य सामाजिक सुविधाओं का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया था। ऐसे समय में श्री गविशिद्धेश्वर मठ के 16वें मठ प्रमुख मरीशांतवीर महास्वामी ने समाज के सर्वांगीण विकास का संकल्प लिया।
15 विद्यार्थियों से शुरू हुआ स्वर्णिम सफर
एक श्रद्धालु भक्त के घर में मात्र 15-20 विद्यार्थियों के साथ “श्री गविशिद्धेश्वर प्राथमिक पाठशाला” की स्थापना कर शिक्षा सेवा का शुभारंभ किया गया। काशी में वर्षों तक अध्ययन कर चुके स्वामी स्वयं विद्या-प्रेमी थे। उनके मार्गदर्शन में संस्था ने निर्धन विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क आवास, भोजन, वस्त्र और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था भी प्रारंभ की।
1963 में ट्रस्ट गठन, मिला व्यापक विस्तार
वर्ष 1963 में एसजीवीवी ट्रस्ट की स्थापना हुई। भक्तों एवं समाजसेवियों के सहयोग से लगभग 500 एकड़ भूमि संस्था को प्राप्त हुई, जिस पर विद्यालय, छात्रावास, खेल मैदान तथा विभिन्न सामाजिक उपयोगों के लिए विशाल अधोसंरचना विकसित की गई।
आधुनिक शिक्षा का सशक्त केंद्र
17वें एवं 18वें मठ प्रमुखों के नेतृत्व में संस्था ने समयानुकूल आधुनिकीकरण का मार्ग अपनाया। आज प्राथमिक विद्यालय से लेकर प्री-यूनिवर्सिटी, स्नातक, स्नातकोत्तर, प्रबंधन, शिक्षक प्रशिक्षण, कंप्यूटर विज्ञान, आयुर्वेद महाविद्यालय, चिकित्सालय, संगीत, शिल्पकला तथा ज्योतिष शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में संस्था कार्यरत है। कोप्पल, कुकुनूर, हूविनहडगली तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 15 से 20 हजार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
15 लाख से अधिक विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य
अभिनव गविसिध्देश्वर स्वामी ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में संस्था के हजारों शिक्षकों ने लगभग 15 लाख से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षित किया है। आज इनके पूर्व विद्यार्थी देश-विदेश में प्रशासन, न्यायपालिका, शिक्षा, उद्योग, विज्ञान, व्यापार और सामाजिक सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
ज्ञान का दीपक यूं ही जलता रहे
पूर्व छात्र श्रेणिक सुराणा ने कहा कि श्री गविशिद्धेश्वर शिक्षण संस्था की यह प्रेरणादायी यात्रा केवल एक शैक्षणिक संस्थान की सफलता नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की जीवंत गाथा है। शिक्षा, संस्कार और सेवा के आदर्शों पर आधारित यह संस्था आने वाली शताब्दियों तक ज्ञान का अखंड दीप प्रज्वलित रखे, यही समाज की मंगलकामना है।
उन्होंने कहा कि विद्या केवल जीवनयापन का साधन नहीं, बल्कि समाज को आलोकित करने वाली दिव्य शक्ति है।
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