पुराने नेताओं की बढ़ी नाराजगी
उत्तर कर्नाटक में लिंगायत आधार मजबूत करने की रणनीति
विकास की उम्मीदों के साथ संगठनात्मक संतुलन की चुनौती
बेलगावी। भाजपा छोडक़र कांग्रेस में शामिल हुए अथणी के विधायक लक्ष्मण सवदी को आखिरकार कांग्रेस सरकार में मंत्री पद मिल गया। उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने को उत्तर कर्नाटक में कांग्रेस का जनाधार मजबूत करने, लिंगायत समुदाय में राजनीतिक पकड़ बढ़ाने और बेलगावी जिले को अधिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस फैसले से लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े नेताओं और उनके समर्थकों में असंतोष भी उभर आया है।
लिंगायत समीकरण और विकास पर दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत समुदाय की निर्णायक भूमिका को देखते हुए कांग्रेस ने सवदी पर भरोसा जताया है। सहकारिता क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें सहकारिता विभाग मिलने की भी चर्चा है।
जिले में पहले से प्रभावशाली नेता सतीश जारकीहोली के साथ अब सवदी के मंत्री बनने से बेलगावी को सरकार में दो मजबूत शक्ति केंद्र मिल गए हैं। इससे कृष्णा घाटी सिंचाई परियोजनाओं, राजमार्ग निर्माण, औद्योगिक निवेश, रोजगार और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पुराने कांग्रेसी खेमे में बढ़ी नाराजगी
बेलगावी जिले की 18 विधानसभा सीटों में कांग्रेस के 11 विधायक होने के बावजूद केवल दो मंत्रिपद मिलने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा है।
मंत्री पद की दौड़ में शामिल माने जा रहे लक्ष्मी हेब्बालकर, अशोक पट्टण और महांतेश कौजलगी के समर्थकों में फैसले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। समर्थकों का कहना है कि वरिष्ठ और मूल कांग्रेस नेताओं की उपेक्षा हुई है।
अब पार्टी नेतृत्व के सामने विकास की अपेक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ संगठन के भीतर उभर रहे असंतोष को शांत करना भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
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