पोस्टमार्टम में सामने आई असली वजह
गर्भ संबंधी समस्या से परे गंभीर संक्रमण की आशंका
डॉक्टर पर हमले के बाद चर्चा में आई थी हंसिनी
शिवमोग्गा. शिवमोग्गा के त्यावरेकोप्पा चिडिय़ाघर में मरी 12 वर्षीय हिप्पोपोटामस ‘हंसिनी’ की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उसकी मौत केवल गर्भाशय संबंधी समस्या से नहीं, बल्कि गंभीर आंतरिक संक्रमण के कारण हो सकती है।
पोस्टमार्टम में क्या आया सामने?
विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा किए गए परीक्षण में पाया गया कि हंसिनी के लीवर (पित्तजनकांग) में गंभीर संक्रमण था, जिसके चलते मल्टी-ऑर्गन फेल्योर (बहु-अंग विफलता) हुई। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिला है कि संक्रमण बैक्टीरिया या वायरस के कारण हो सकता है।
चिकित्सकों के अनुसार, यदि गर्भ में पल रहा भ्रूण पहले ही मर गया होता, तो शरीर में गैस बनती और भ्रूण सड़ी अवस्था में मिलता। लेकिन ऐसा कोई संकेत नहीं मिला, जिससे स्पष्ट होता है कि मुख्य कारण संक्रमण ही रहा होगा।
गर्भावस्था भी बनी जटिलता
रिपोर्ट के अनुसार, हंसिनी गर्भवती थी और कुछ ही हफ्तों में प्रसव संभावित था। उसकी मौत के बाद गर्भ में मौजूद नर भ्रूण की भी मृत्यु हो गई। पिछले कुछ दिनों से हंसिनी की भूख कम हो गई थी और व्यवहार में भी बदलाव देखा जा रहा था।
सैंपल जांच के लिए भेजे गए
हंसिनी के लीवर, किडनी, फेफड़े और हृदय के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण के सटीक कारणों का खुलासा होगा।
पशु चिकित्सक पर हमले से चर्चा में आई थी घटना
गौरतलब है कि इसी हंसिनी ने 20 मार्च को प्रशिक्षु पशु चिकित्सक समीक्षा रेड्डी पर हमला किया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद मामला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था।
अब अकेला रह गया ‘विष्णु’
चिडिय़ाघर में पहले ‘हंसिनी’ और ‘विष्णु’ नामक दो हिप्पो थे। हंसिनी की मौत के बाद अब ‘विष्णु’ अकेला रह गया है। अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में प्राणी विनिमय योजना के तहत उसके लिए मादा साथी लाने की योजना है।
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