होर्मुज़ जलसंधि खुलते ही तेल बाजार में राहत, पश्चिम एशिया में शांति के संकेत
कच्चे तेल के दाम गिरे, वैश्विक बाजार में तेजी; इजराइल-लेबनान संघर्ष में अस्थायी युद्धविराम
न्यूयॉर्क. ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को पूर्ण रूप से खोलने पर सहमति देने से पिछले डेढ़ महीने से जारी वैश्विक ऊर्जा संकट में राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 89 डॉलर से नीचे आ गई है, जो पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद दर्ज न्यूनतम स्तर है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में एलपीजी सिलेंडर और तेल की आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे कीमतों में और गिरावट संभव है। शुक्रवार को विभिन्न देशों के शेयर बाजारों में लगभग 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
होर्मुज मार्ग खुलने से फारस की खाड़ी से तेल जहजों का आवागमन सुगम हुआ है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कम हुआ है। अमेरिका के फेडरल रिज़र्व द्वारा 28 अप्रेल को घोषित की जाने वाली मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती की संभावना जताई जा रही है।
लेबनान–इजराइल संघर्ष विराम
बेरूत — अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “लेबनान पर आगे कोई हमला न हो, इसके लिए अमेरिका ने इजराइल पर प्रतिबंध लगाया है।” इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हालांकि स्पष्ट किया कि “हिज़्बुल्ला के खिलाफ अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है।”
यह संघर्ष विराम पाकिस्तान की मध्यस्थता कोशिशों को बल प्रदान करता है और अमेरिका–ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता का मार्ग प्रशस्त करता है।
वार्ता के प्रमुख मुद्दे
ईरान में यूरेनियम संवर्धन रोकना
होर्मुज जलडमरूमध्य को मुक्त रखना
युद्ध से हुई आर्थिक क्षति की भरपाई
युद्धजनित हताहत: ईरान 3,000; लेबनान 2,100; इजराइल 23; खाड़ी देश 12; अमेरिका 13
पाकिस्तान की तैयारी
इस्लामाबाद में वार्ता के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने तेहरान में ईरानी अधिकारियों से चर्चा की, जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब, कतर और तुर्की की यात्रा कर समर्थन जुटाया।
श्रीलंका पर असर
कोलंबो — संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया संघर्ष से एशिया–प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभावित देश श्रीलंका है। युद्ध के बाद 80 प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों ने देश छोड़ा, पर्यटन में 40 प्रतिशत गिरावट आई और चाय निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष से 14 देशों में लगभग 88 लाख लोग गरीबी की ओर धकेले जाने के खतरे में हैं।
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