दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी सरकार; विपक्ष के विरोध से अटके अहम सुधार
नई दिल्ली: लोकसभा में केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े अहम संवैधानिक संशोधन विधेयक आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण गिर गए।
लोकसभा में शुक्रवार को सरकार द्वारा पेश किए गए महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक बहुमत परीक्षण में असफल हो गए। इन विधेयकों को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया, जिससे ये प्रस्ताव गिर गए और सरकार को राजनीतिक रूप से बड़ा झटका लगा।
संसद में लंबी बहस के बाद हुए मतदान में कुल 489 सांसदों ने भाग लिया। इनमें से 278 सांसदों ने विधेयकों के पक्ष में मतदान किया, जबकि 211 सांसदों ने विरोध किया। संवैधानिक संशोधन विधेयकों के लिए कम से कम 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक था, जो सरकार जुटाने में असफल रही।
इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाना, 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण (परिसीमन) करना और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना था। सरकार का दावा था कि इससे लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित और समावेशी बनेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से इन विधेयकों के समर्थन की अपील की थी, लेकिन कांग्रेस सहित ‘इंडिया’ गठबंधन के दलों ने इसे खारिज करते हुए विरोध में मतदान किया। विपक्ष का कहना था कि प्रस्तावित बदलावों में कई व्यावहारिक और राजनीतिक चुनौतियां हैं, जिन पर व्यापक सहमति आवश्यक है।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 सहित अन्य विधेयक पेश किए थे। हालांकि, अपेक्षित समर्थन न मिलने के कारण इन्हें पारित नहीं किया जा सका।
यह घटनाक्रम संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान को उजागर करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इन विधेयकों को संशोधित रूप में फिर से पेश कर सकती है, लेकिन इसके लिए व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना आवश्यक होगा।
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