किसानों की मांग—9.5 प्रतिशत रिकवरी वाले गन्ने का 5,000 रुपए प्रति टन तय हो भाव
बागलकोट। त्योहारी सीजन में बाजार में चीनी की कीमत करीब 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने के बावजूद गन्ना उत्पादक किसानों को इसका लाभ नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ रही है। किसानों ने आगामी गन्ना पेराई सत्र के लिए उचित एवं वैज्ञानिक दर तय करने की मांग की है।
कारखानों को मुनाफा, किसान को संघर्ष
जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है। चीनी मिलों और व्यापारियों को चीनी की बढ़ी कीमतों का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा मिलों को शीरा, बिजली उत्पादन, डिस्टिलरी और इथेनॉल सहित विभिन्न सह-उत्पादों से भी आय होती है। दूसरी ओर, गन्ना उत्पादक किसानों को हर साल उचित मूल्य के लिए आंदोलन करना पड़ता है।
एफआरपी पर उठे सवाल
पिछले वर्ष 11.3 प्रतिशत रिकवरी के आधार पर प्रति टन 3,550 रुपए दर घोषित की गई थी। किसानों का कहना है कि जिले की अधिकांश मिलों में रिकवरी 11 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंचती, जिससे घोषित उचित मूल्य का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाता। किसानों ने एफआरपी तय करते समय खेती की वास्तविक लागत और उत्पादन खर्च को वैज्ञानिक आधार पर शामिल करने की मांग की है।
5,000 रुपए प्रति टन की मांग
किसान नेता सुभाष शिरबूर ने कहा कि पिछले वर्ष आंदोलन के बाद कुछ मिलों ने 3,250 रुपए प्रति टन की दर घोषित की थी और सरकार ने 50 रुपए प्रोत्साहन राशि दी थी। कुछ मिलों पर अब भी करीब 35 करोड़ रुपए बकाया होने का दावा किया गया है। चीनी की बढ़ी कीमत का लाभ गन्ना किसानों तक भी पहुंचना चाहिए। 9.5 प्रतिशत रिकवरी वाले गन्ने के लिए 5,000 रुपए प्रति टन दर निर्धारित की जानी चाहिए और एफआरपी वैज्ञानिक आधार पर तय होनी चाहिए।
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