हुब्बल्ली के केएसएलयू के समानांतर बेंगलूरु में नए कानून विवि की कवायद
जनप्रतिनिधियों और वकीलों ने उठाए सवाल
हुब्बल्ली। उत्तर कर्नाटक के शैक्षणिक नक्शे पर महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले कर्नाटक राज्य विधि विश्वविद्यालय (केएसएलयू) के समानांतर बेंगलूरु में नया कानून विश्वविद्यालय स्थापित करने की कवायद ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और वकीलों के बीच असंतोष पैदा किया है। सवाल यह है कि जब हुब्बल्ली स्थित विश्वविद्यालय के माध्यम से राज्यभर के कानून महाविद्यालयों का संचालन किया जा रहा है, तब अलग विश्वविद्यालय की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है?
हुब्बल्ली के नवनगर में 2009 में स्थापित केएसएलयू आज राज्य के कानून शिक्षा तंत्र का प्रमुख संस्थान है। हालिया न्यायिक दस्तावेजों में भी विश्वविद्यालय का पता नवनगर, हुब्बल्ली दर्ज है और कर्नाटक के विभिन्न कानून महाविद्यालय इससे संबद्ध हैं।
विभागीय पत्र से सामने आई कवायद
कानून, न्याय एवं मानवाधिकार विभाग की ओर से केएसएलयू के कुलसचिव को भेजे गए जुलाई के पत्र में बेंगलूरु अथवा बेंगलूरु दक्षिण जिले में दक्षिण कानून विश्वविद्यालय शुरू करने के प्रस्ताव का उल्लेख होने की बात सामने आई है। विभाग ने प्रस्ताव से जुड़े आर्थिक बोझ, आवश्यक कर्मचारियों, न्यूनतम भूमि तथा आधारभूत सुविधाओं की विस्तृत जानकारी मांगी है।
इससे यह स्पष्ट है कि मामला केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रस्ताव से संबंधित प्रशासनिक स्तर पर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया हुई है।
अंतिम निर्णय से पहले हो व्यापक चर्चा
धारवाड़ उच्च न्यायालय पीठ के अधिवक्ता मल्लिकार्जुन पूजारी ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और मुख्य सचिव समेत संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रस्ताव पर पुनर्विचार और व्यापक परामर्श की मांग की है। उनका कहना है कि आज प्रवेश, परीक्षा आवेदन, परिणाम और पुनर्मूल्यांकन जैसी अनेक प्रक्रियाएं ऑनलाइन संचालित होती हैं, इसलिए भौगोलिक दूरी को आधार बनाकर नया विश्वविद्यालय बनाने के औचित्य पर विचार होना चाहिए।

होरट्टी ने जताया विरोध
विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व सभापति बसवराज होरट्टी ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बेंगलूरु में अलग कानून विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हुब्बल्ली में केएसएलयू की स्थापना उत्तर कर्नाटक के लंबे संघर्ष का परिणाम थी और नया विश्वविद्यालय क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने के बजाय उसे लेकर नई चिंताएं पैदा कर सकता है।
होरट्टी ने हुब्बल्ली स्थित केएसएलयू को विशेष अनुदान, बेहतर आधारभूत सुविधाएं तथा रिक्त स्थायी शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय पदों को भरने की मांग भी की है।
अब मुद्दा केवल नए विश्वविद्यालय का नहीं, बल्कि राज्य में कानून शिक्षा के प्रशासनिक ढांचे, संसाधनों के वितरण और क्षेत्रीय संतुलन का भी बन गया है।
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