सीबीआई और मृतक के भाई की याचिकाओं पर सुनवाई पूरी
राजनीतिक हत्याओं को गंभीरता से लेने की जरूरत पर अदालत की टिप्पणी
हुब्बल्ली। भाजपा नेता योगीश गौड़ा गौडऱ हत्याकांड में कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और मृतक के भाई गुरुनाथ गौड़ा ने जमानत तथा दोषसिद्धि पर रोक से जुड़े हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायाधीश चंद्रशेखर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उन्हें लिखित आपत्तियां दाखिल करने के लिए पांच दिन का समय दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने राजनीतिक हत्याओं को गंभीरता से लेने और ऐसे मामलों में कानून से बच निकलने की गुंजाइश नहीं रहने की जरूरत पर टिप्पणी की।
सीबीआई ने उठाए साक्ष्य और गवाहों के मुद्दे
सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि दोषसिद्धि पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित सिद्धांतों का पालन जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक रहते हुए विनय कुलकर्णी ने साक्ष्य नष्ट करने और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया था। एजेंसी ने इसी मामले में पहले उनकी जमानत रद्द किए जाने का भी उल्लेख किया।
सीबीआई ने कहा कि अभियोजन के पास सरकारी गवाह के बयान के अलावा अन्य सहायक साक्ष्य भी हैं। एजेंसी ने हाईकोर्ट की उस टिप्पणी पर भी सवाल उठाया, जिसमें कुलकर्णी की आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं होने का उल्लेख किया गया था।
बचाव पक्ष ने देरी और गवाहों की गवाही का दिया हवाला
विनय कुलकर्णी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जमानत और दोषसिद्धि पर रोक के समर्थन में दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि शुरुआती आरोपपत्र में कुलकर्णी का नाम नहीं था और गवाहों की सुनवाई शुरू होने के करीब चार साल बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।
सिंघवी ने सरकारी गवाह बसवराज मुत्तगी की गवाही और अन्य गवाहों के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि अभियोजन के सभी आरोपों को गवाहों का समर्थन नहीं मिला। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने से कुलकर्णी की विधायक सदस्यता प्रभावित हो सकती है और बाद में राहत मिलने पर भी इसकी भरपाई मुश्किल होगी।
भूमि विवाद का भी उल्लेख
बचाव पक्ष ने हत्या के पीछे भूमि विवाद होने का दावा किया और कहा कि मृतक की पत्नी ने भी इस पहलू पर गवाही दी थी। सिंघवी के अनुसार, निचली अदालत ने सरकारी गवाह के बयान पर भरोसा कर सजा सुनाई, जबकि हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाई।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब लिखित आपत्तियां दाखिल होने के बाद अदालत का फैसला आएगा।
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