केंद्र-राज्य टकराव के बीच 135 करोड़ रुपए की परियोजना अधर में
राज्य हिस्से की राशि पर अटका मामला
बेलगावी. केंद्र और राज्य सरकार के बीच खींचतान के कारण बेलगावी को ‘सिटीज 2.0’ योजना से वंचित होने का खतरा पैदा हो गया है। शहर में स्वच्छता और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।
इस योजना के तहत बेलगावी को लगभग 135 करोड़ रुपए की सहायता मिलने वाली थी। इसमें केंद्र सरकार 40 प्रतिशत, राज्य सरकार 40 प्रतिशत और महानगर निगम 20 प्रतिशत राशि देने वाली थी। केंद्र सरकार ने योजना की घोषणा कर स्मार्ट सिटी अधिकारियों को अनुदान की पहली किश्त भी जारी कर दी है। महानगर निगम भी अपने हिस्से के करीब 29 करोड़ रुपए देने को तैयार है, लेकिन राज्य सरकार अपने 40 प्रतिशत हिस्से की राशि देने के लिए तैयार नहीं है।
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि यह राशि राज्य वित्त आयोग के अनुदान से ही महानगर निगम को वहन करनी होगी। इस मुद्दे पर हाल ही में हुई महानगर निगम की सामान्य सभा में विधायक अभय पाटील ने केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की कड़ी आलोचना की थी।
केंद्र के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने नवंबर 2023 में शहरों में परिपत्र अर्थव्यवस्था, ठोस कचरा प्रबंधन और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘सिटीज 2.0’ (इनोवेशन, इंटीग्रेशन और सस्टेन के लिए शहर में निवेश) योजना शुरू की थी। फरवरी 2024 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय जूरी के समक्ष ‘समग्र ठोस कचरा प्रबंधन एवं स्थिरता योजना’ का प्रस्ताव पेश करने के बाद बेलगावी को इस परियोजना के लिए चुना गया था।
करीब 165 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली इस योजना के तहत केंद्र सरकार लगभग 75 करोड़ रुपए देने वाली है और पहली किश्त के तौर पर 7.5 करोड़ रुपए जारी भी किए जा चुके हैं। लेकिन राज्य सरकार की हिस्सेदारी अटकने से परियोजना राजनीतिक विवाद में घिर गई है।
उधर, स्मार्ट सिटी लिमिटेड की प्रक्रियागत देरी, सलाहकार संस्था की नियुक्ति में विलंब और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विवाद भी परियोजना की राह में बाधा बन गए हैं। इन परिस्थितियों में महानगर निगम प्रशासन अब योजना की लागत घटाकर केवल केंद्र और नगर निगम के अनुदान से काम पूरा करने की संभावना भी तलाश रहा है।

