साइबेरिया से आने वाली प्रवासी प्रजाति
विशेषज्ञों ने दर्ज की दुर्लभ उपस्थिति
गदग. जिले के रोन तालुक के होलेआलूर क्षेत्र में मलप्रभा नदी के तट पर पहली बार कॉमन चिफचाफ पक्षी देखी गई है। यह पक्षी फिलोस्कोपिडे परिवार की छोटी कीटभक्षी प्रजाति है, जिसे स्थानीय तौर पर ‘कंदु एले उलियक्की’ भी कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम फिलोस्कोपस कोलिबिटा है। यह आकार में छोटा होता है और पेड़ों की पत्तियों के बीच छिपकर कीटों का शिकार करता है। उड़ते हुए भी कीट पकडऩे की इसकी क्षमता इसे अन्य पक्षियों से अलग बनाती है।
वन्यजीव फोटोग्राफर संगमेश कडगद ने बताया कि चिफचाफ पक्षी मूल रूप से साइबेरिया तथा उत्तर और मध्य एशिया के क्षेत्रों से प्रवास कर आते हैं। अपने मूल स्थानों की कड़ाके की ठंड से बचने के लिए ये पक्षी अक्टूबर के अंत से फरवरी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी मैदानों की ओर आते हैं।
जैव विविधता शोधकर्ता मंजुनाथ नायक के अनुसार यदि प्रवासी पक्षियों को कोई क्षेत्र सुरक्षित लगता है, तो वे हर मौसम में उसी क्षेत्र या आसपास के इलाकों में वापस आते रहते हैं। ऐसे में मलप्रभा तट पर इस पक्षी की उपस्थिति स्थानीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

