शरीर अनित्य और आत्मा शाश्वत बताकर धर्म पालन पर जोर
दावणगेरे. श्रीशंखेश्वर पाश्र्व राजेन्द्र गुरुमंदिर संघ, काईपेट में आयोजित प्रवचन में साध्वी भव्यगुणा ने धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव शरीर अनित्य है और कभी भी शाश्वत नहीं हो सकता। मृत्यु सदैव इसके समीप रहती है, इसलिए मनुष्य का परम कर्तव्य धर्म का आचरण करना है।
साध्वी ने कहा कि मनुष्य शरीर और वैभव को स्थायी मानने की भूल करता है, जबकि आत्मा ही शाश्वत और अविनाशी है। विषयों के प्रति आसक्ति के कारण व्यक्ति शरीर को ही नित्य समझ बैठता है, लेकिन धर्म ही उसे संसार सागर से पार लगा सकता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि धर्म का सहारा कभी न छोड़ें, क्योंकि यही मुक्ति का सच्चा मार्ग है।
साध्वी ने कहा कि यह संसार मायावी है और आत्मा ही वास्तविक सत्य है। जो स्वयं भ्रमित रहता है, वह दूसरों को सही मार्ग नहीं दिखा सकता। आत्मज्ञान प्राप्त व्यक्ति ही जीवन का सच्चा पथप्रदर्शक बन सकता है। मनुष्य जानता है कि वह अकेले आया है और अकेले ही जाएगा, फिर भी वह परिग्रह बढ़ाने में लगा रहता है।
इस अवसर पर साध्वी शीतलगुणा ने कहा कि धर्म के प्रति श्रद्धा और विश्वास से ही सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है। ज्ञान दुर्लभ है, लेकिन एक बार प्राप्त हो जाए तो मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। कर्मों के अनुसार जीवात्मा विभिन्न योनियों में भटकती रहती है और धर्म का पालन करने वाले ही अंतत: सिद्धलोक को प्राप्त करते हैं।

