टिकट न मिलने पर उतरे थे मैदान में, अब कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन का संकेत
दावणगेरे. दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में सियासी खींचतान के बीच कांग्रेस को बड़ी राहत मिली है। टिकट न मिलने से नाराज होकर बागी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे सादिक पहलवान को मनाने में मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या सफल रहे हैं। उनके मान जाने से पार्टी खेमे में एकजुटता की तस्वीर उभरती दिख रही है।
सूत्रों के अनुसार, सादिक पहलवान लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और वरिष्ठ नेता शामनूर शिवशंकरप्पा के साथ उनका करीब चार दशक का राजनीतिक संबंध रहा है। इस बार वे पार्टी टिकट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन कांग्रेस ने एस.एस. मल्लिकार्जुन के पुत्र समर्थ को उम्मीदवार बनाया। इससे नाराज होकर सादिक ने बागी तेवर अपनाते हुए नामांकन दाखिल कर दिया था।
नामांकन वापसी के अंतिम दिन गुरुवार को केपीसीसी कार्याध्यक्ष सलीम अहमद और विधायक रिजवान अर्शद सहित कई नेताओं ने सादिक को मनाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में कोई सफलता नहीं मिली। नामांकन वापसी की समयसीमा समाप्त होने के बाद भी उनके आवास पर बातचीत का दौर जारी रहा।
इसके बाद शुक्रवार को सलीम अहमद और रिजवान अर्शद सादिक पहलवान को मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के आवास पर लेकर पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री ने उनसे विस्तृत चर्चा की और भरोसा दिलाया कि उनकी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। साथ ही पार्टी हित में एकजुट होकर काम करने की अपील की।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री की अपील और आश्वासन के बाद सादिक पहलवान ने नरमी दिखाई और कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन में काम करने पर सहमति जताई है। हालांकि औपचारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन उनके रुख में आए बदलाव को पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक राहत माना जा रहा है।
राज्य में चल रहे उपचुनाव कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने हुए हैं। ऐसे में आंतरिक मतभेदों को सुलझाकर एकजुटता बनाए रखना पार्टी की प्राथमिकता है। सादिक पहलवान के मान जाने से दावणगेरे दक्षिण सीट पर कांग्रेस की स्थिति और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
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