नेताओं की बर्खास्तगी पर नाराजगी; फैसले वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी
बेंगलूरु: शहर में दावणगेरे उपचुनाव के बाद कांग्रेस द्वारा मुस्लिम नेताओं पर की गई कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। राज्य उलेमा बोर्ड और विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस पार्टी को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि फैसले वापस नहीं लिए गए, तो पार्टी को “तलाक” दिया जाएगा और सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन स में मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को मुसलमानों की जरूरत है, न कि मुसलमानों को कांग्रेस की। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना नोटिस और ठोस आधार के समुदाय के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
जमीयत उलेमा नॉर्थ बेंगलूरु के अध्यक्ष मोहम्मद सलाहुद्दीन अय्यूबी ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही मुस्लिम समुदाय के साथ अन्याय बढ़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि 2028 के चुनावों में इसका असर दिखेगा और समुदाय के वरिष्ठ नेता आगे की रणनीति तय करेंगे।
समुदाय के नेताओं ने नसीर अहमद और अब्दुल जब्बार के खिलाफ की गई कार्रवाई को “अक्षम्य” बताया। उनका कहना है कि इन नेताओं को पार्टी से जिस तरह हटाया गया, वह अपमानजनक है और इससे पूरे समुदाय में नाराजगी है।
वक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब अन्य नेताओं पर आरोप लगे, तब पार्टी आलकमान ने कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने डी.के. शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं से स्थिति की गंभीरता समझने की अपील की।
मुस्लिम संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगले महीने होने वाले राज्यस्तरीय उलेमा सम्मेलन में कांग्रेस के खिलाफ बड़ा निर्णय लिया जाएगा। इस चेतावनी ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
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