युद्धविराम बढ़ा, फिर भी तनाव बरकरार: पश्चिम एशिया में हालात नाजुक

डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद भी होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की कार्रवाई; शांति वार्ता पर अनिश्चितता

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो सप्ताह के युद्धविराम की अवधि समाप्त होने से ठीक पहले इसके विस्तार की घोषणा की, जिसे ईरान ने भी स्वीकार कर लिया है।

इस फैसले से सात सप्ताह से जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में कूटनीतिक प्रयासों को कुछ राहत मिली है। ट्रंप ने बताया कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के अनुरोध पर यह कदम उठाया गया, ताकि दोनों पक्षों के बीच संभावित शांति समझौते के लिए समय मिल सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दूसरे चरण की वार्ता जल्द शुरू हो सकती है।

हालांकि, इस घोषणा के कुछ ही समय बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा तीन जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटना ने हालात को फिर तनावपूर्ण बना दिया। रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से दो जहाजों को कब्जे में लिया गया, जबकि एक को नुकसान पहुंचा। इस घटनाक्रम ने युद्धविराम की विश्वसनीयता और शांति वार्ता की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के साथ नई वार्ता में शामिल होने पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है। इस्माइल बकाई ने कहा कि अमेरिका की “अविश्वसनीय और बदलती नीतियों” ने भरोसे को कमजोर किया है। वहीं, सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है।

दूसरी ओर, ट्रंप ने अपने रुख में बदलाव दिखाते हुए कहा कि फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोकी जाएगी, लेकिन ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रहेगी। इस बीच, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए कड़ा जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि युद्धविराम का विस्तार कूटनीतिक समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन जमीनी हालात को देखते हुए सतर्कता जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही सैन्य गतिविधियां और परस्पर अविश्वास शांति प्रक्रिया को पटरी से उतार सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली वार्ताएं ही यह तय करेंगी कि क्षेत्र में स्थायी शांति संभव हो पाएगी या नहीं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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