हुब्बल्ली में अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन का उद्घाटन
परंपरा और आधुनिकता के समन्वय पर जोर
हुब्बल्ली. स्वर्ण समूह संस्थान के प्रबंध निदेशक डॉ. वीएसवी प्रसाद ने कहा कि आयुर्वेद और योग को आज वैश्विक स्तर पर व्यापक मान्यता मिल रही है। मानव जीवन की रक्षा करने वाले चिकित्सक भगवान के समान होते हैं और प्राचीन काल में रोगों के उपचार के लिए मुख्य रूप से आयुर्वेद पद्धति का ही सहारा लिया जाता था।
देशपांडे नगर स्थित सवाई गंधर्व कला मंदिर में आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक आयुर्वेद सम्मेलन एवं एक्सपो के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्रसाद ने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान पाश्चात्य चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) के प्रसार से पारंपरिक प्रणालियों का प्रभाव कम हुआ। साथ ही भारतीय शिक्षा की गुरुकुल परंपरा भी प्रभावित हुई।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में केंद्र सरकार के प्रयासों और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय परंपराओं का पुनर्जागरण हो रहा है। योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जा रहा है और आयुर्वेद भी पुन: प्रतिष्ठा हासिल कर रहा है। भारत परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है और शीघ्र ही विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने इसे स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत बताया।
कायक्रम की अध्यक्षता गोविंद जोशी ने की। इस अवसर पर डॉ. अल्लमप्रभु गुड्ड (अध्यक्ष, आयुर्वेद बोर्ड, एनसीआईएसएम, नई दिल्ली), संजय जोशी, डॉ. जेआर जोशी तथा आयोजन सचिव डॉ. सौरभ कोकट्नूर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
डॉ. अल्लमप्रभु गुड्ड ने आयुर्वेद में शुरू होने वाले 18वें स्नातकोत्तर विभाग ‘आयुर्वेद बायोलॉजी’ और डीएम पाठ्यक्रम की जानकारी दी। वहीं डॉ. सौरभ कोकट्नूर ने सम्मेलन की थीम और इसके पारंपरिक महत्व पर प्रकाश डाला।
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