शिक्षकों की कमी और जर्जर भवनों के बीच नए सत्र का आगाजस्कूल का जर्जर भवन।

कोप्पल जिले में 2,479 शिक्षक पद रिक्त

533 कक्षाओं की मरम्मत बाकी

आधी पाठ्यपुस्तकें ही पहुंचीं

कोप्पल. ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के लिए शिक्षा विभाग तैयार है। हालांकि जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी, जर्जर भवनों, शौचालयों की खराब स्थिति और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच नया सत्र शुरू हो रहा है।

जिले में 928 प्राथमिक और 211 माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें कुल 1,81,803 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस वर्ष एसएसएलसी परीक्षा परिणाम में सुधार हुआ है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की कई मूलभूत समस्याएं अब भी बरकरार हैं।

प्राथमिक विद्यालयों में स्वीकृत 5,562 शिक्षक पदों में से केवल 3,688 पद भरे हुए हैं, जबकि 1,874 पद रिक्त हैं। वहीं माध्यमिक विद्यालयों में 1,825 स्वीकृत पदों के मुकाबले 1,220 शिक्षक कार्यरत हैं और 605 पद खाली हैं। भर्ती प्रक्रिया में देरी और स्थानांतरण के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। ऐसे में विद्यालयों में शिक्षण कार्य अतिथि शिक्षकों के सहारे चलाया जा रहा है।

जिले के विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति भी चिंता का विषय है। कुल 4,556 शौचालयों में से एक हजार से अधिक अनुपयोगी हो चुके हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी के कारण विद्यालयों की साफ-सफाई बनाए रखना भी चुनौती बन गया है।

पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति भी अभी अधूरी है। जिले में 27.82 लाख पुस्तकों की मांग के मुकाबले अब तक केवल 15.78 लाख पुस्तकें, यानी लगभग 56.73 प्रतिशत ही प्राप्त हुई हैं। इन्हें विद्यालयों तक पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है। वहीं पहली खेप में 1.36 लाख से अधिक यूनिफॉर्म भी भेजी गई हैं।

विद्यालय भवनों की स्थिति भी चिंताजनक है। जिले में 937 कक्षाएं उपयोग योग्य नहीं हैं। इनमें से कुछ की मरम्मत हो चुकी है, लेकिन अभी भी 533 कक्षाओं की मरम्मत लंबित है। सबसे अधिक प्रभावित गंगावती, यलबुर्गा और कुष्टगी तालुक हैं।

मध्याह्न भोजन योजना के लिए रसोई गैस सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बनी हुई है। शिक्षा विभाग ने प्रशासन और गैस एजेंसियों से विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

इन चुनौतियों के बावजूद नए सत्र के स्वागत के लिए विद्यालयों में विशेष तैयारियां की गई हैं। ग्रामीण संस्कृति की झलक दिखाते हुए तोरण, बैलगाड़ी, पारंपरिक वेशभूषा और पुष्पों के साथ विद्यार्थियों का स्वागत करने की योजना बनाई गई है, ताकि बच्चों में विद्यालय के प्रति उत्साह और अपनापन बढ़ाया जा सके।

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By Bharat Ki Awaz

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