योग और प्राकृतिक चिकित्सा को मिल रही वैश्विक मान्यता : राज्यपाल गहलोतदावणगेरे के निकट दोड्डबाती स्थित तपोवन संस्थान के दीक्षांत समारोह का उद्घाटन करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत।

‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य में युवा चिकित्सक बनें परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु

दावणगेरे. कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात के जामनगर में स्थापित किया जा रहा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ग्लोबल सेंटर भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वे दावणगेरे के निकट दोड्डबाती स्थित तपोवन आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत की चिकित्सा परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध विरासतों में से एक है।

‘विकसित भारत-2047’ में स्वास्थ्य क्षेत्र की अहम भूमिका

राज्यपाल ने कहा कि भारत ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में स्वास्थ्य क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वस्थ नागरिक ही मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं और चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे युवा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

आयुर्वेद संपूर्ण जीवन पद्धति

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार का विज्ञान नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का समग्र दर्शन है। वर्तमान की भागदौड़, मानसिक तनाव और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा की प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है।

युवा चिकित्सकों को अनुसंधान पर जोर देने की सलाह

राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल तकनीकों का उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में युवा चिकित्सकों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच मजबूत सेतु बनना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप केवल चिकित्सक बनकर न रहें, बल्कि शोधकर्ता, नवप्रवर्तक और समाज के मार्गदर्शक के रूप में भी अपनी पहचान बनाएं। चिकित्सा क्षेत्र में नए अनुसंधानों को प्राथमिकता दें।

आयुष मंत्रालय के प्रयासों की सराहना

राज्यपाल ने कहा कि आयुष मंत्रालय आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व स्तर पर मान्यता मिल रही है।

योग मानसिक शांति और अनुशासन का माध्यम

उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि आत्मानुशासन, मानसिक संतुलन और शांति का मार्ग है। स्वस्थ समाज के निर्माण में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य नारायणसा भांडगे, मैसूरु कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.वी. हलसे, राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के पूर्व डीन डॉ. श्रीनिवास बन्निगोल, तपोवन समूह संस्थाओं के अध्यक्ष डॉ. वी.एम. शशिकुमार, डॉ. के.आर. अश्विनी तथा डॉ. सुमना भट्ट सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

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By Bharat Ki Awaz

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