चार कॉलेजों की घोषणा और दो को मंजूरी के बावजूद वर्षों से नहीं हुई शुरुआत
गरीब विद्यार्थियों के लिए महंगी निजी शिक्षा बनी मजबूरी
हुब्बल्ली। उत्तर कर्नाटक में सरकारी विधि कॉलेजों की कमी के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय विद्यार्थियों के लिए कानून की पढ़ाई का सपना महंगा होता जा रहा है। सरकार ने इस क्षेत्र में विधि शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चार सरकारी विधि कॉलेजों की घोषणा की थी। इनमें से दो कॉलेजों को वर्ष 2021-22 में शुरू करने की मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन वर्षों बाद भी एक भी कॉलेज शुरू नहीं हो सका है।
दक्षिण कर्नाटक की तुलना में उत्तर कर्नाटक में विधि कॉलेजों की संख्या काफी कम है। पूरे उत्तर कर्नाटक में केवल एक सरकारी विधि कॉलेज है, जो कलबुर्गी में है। इसके अलावा निजी और अनुदानित संस्थानों को मिलाकर कुल 53 विधि कॉलेज हैं। वहीं दक्षिण कर्नाटक में पांच सरकारी कॉलेजों सहित कुल 121 विधि कॉलेज संचालित हो रहे हैं।
हावेरी और शेरवाड़ में भी अटका मामला
कलबुर्गी के अलावा सरकार ने हाल के वर्षों में हावेरी तथा हुब्बल्ली तालुक के शेरेवाड़ गांव में सरकारी विधि कॉलेज शुरू करने का आदेश दिया था। जमखंडी और बेलगावी में भी सरकारी विधि कॉलेज खोलने की घोषणाएं हुई थीं। हावेरी में सरकारी भवन चिह्नित किए हुए दो वर्ष बीत चुके हैं, जबकि शेरेवाड़ में कॉलेज शुरू करने की दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है।
उत्तर कर्नाटक में स्थित विधि विश्वविद्यालय और उसके अधीन एक विधि कॉलेज भी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। विश्वविद्यालय की स्थापना के 17 वर्ष बाद तक आवश्यक प्रशासनिक भवन तक नहीं था। पिछले करीब एक वर्ष में प्रशासनिक भवन और पुस्तकालय समेत कुछ निर्माण कार्य शुरू हुए हैं।
गरीब विद्यार्थियों के लिए सरकारी कॉलेज जरूरी
सरकारी विधि कॉलेजों में सालाना शुल्क करीब 12 हजार रुपए है, जबकि निजी संस्थानों में फीस कॉलेज के स्तर के अनुसार काफी अधिक होती है। ऐसे में गरीब विद्यार्थियों के लिए निजी कॉलेजों में कानून की पढ़ाई करना आसान नहीं है। इसी कारण सरकार ने उत्तर कर्नाटक में सरकारी विधि कॉलेजों को प्राथमिकता देने की घोषणा की थी।
चामराजनगर में भी सरकारी विधि कॉलेज मंजूर हुआ था। वहां जनप्रतिनिधियों की सक्रियता के चलते पिछले वर्ष कॉलेज शुरू हो गया। इसके विपरीत उत्तर कर्नाटक में मंजूर कॉलेजों का वर्षों तक शुरू न होना जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े कर रहा है।
मंजूर कॉलेज शुरू करने की इच्छाशक्ति भी नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता विकास सोप्पिन ने कहा कि जिद के साथ संघर्ष कर विकास योजनाएं लाने की क्षमता हमारे जनप्रतिनिधियों में नहीं है। कम से कम सरकार द्वारा मंजूर किए गए विधि कॉलेज शुरू कराने की इच्छाशक्ति भी नहीं होना विडंबना है। लगता है कि इन्हें मतदाताओं का डर ही नहीं रहा।
सरकार द्वारा कॉलेज मंजूर किए जाने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढऩे से क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी है। अब सवाल यही है कि वर्षों से लंबित इन सरकारी विधि कॉलेजों को आखिर कब शुरू किया जाएगा।
“जानकारी नहीं, आदेश हुआ तो कॉलेज शुरू कराने का प्रयास करूंगा”
कुंदगोल के विधायक एम.आर. पाटील ने कहा कि “मेरे विधानसभा क्षेत्र के शेरेवाड़ गांव में सरकारी विधि कॉलेज मंजूर होने की जानकारी मेरे ध्यान में नहीं है। इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात करूंगा। यदि इसका आधिकारिक आदेश हुआ है तो कॉलेज शुरू कराने का प्रयास करूंगा।”
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