389 एकड़ आरक्षित वन भूमि खाली करने का आदेश

400 करोड़ रुपए की जमीन पर बढ़ी हलचल

सिरसी की कामधेनु सहकारी संस्था को बड़ा झटका

सीसीएफ अदालत ने अपील खारिज कर वन विभाग को तत्काल कब्जा लेने का निर्देश दिया

सिरसी. उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी तालुक स्थित गोलिकट्टा में कामधेनु सहकारी संस्था को लीज पर दी गई 389.07 एकड़ आरक्षित वन भूमि को तत्काल वन विभाग के हवाले करने का आदेश मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ), केनरा वृत्त की अदालत ने जारी किया है। इस फैसले के बाद करीब 400 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की भूमि पर वर्षों से कथित रूप से विकसित किए गए अरेका बागानों से जुड़े प्रभावशाली लोगों की चिंता बढ़ गई है।

1989 में समाप्त हो चुकी थी लीज

वन विभाग के अनुसार, वर्ष 1969 में यह भूमि 30 वर्ष की लीज पर दी गई थी। बाद में 1976 में इसकी अवधि घटाकर 20 वर्ष कर दी गई, जिसके चलते 1989 में ही लीज समाप्त हो गई थी। इसके बावजूद संस्था ने भूमि खाली नहीं की। 1980 के वन संरक्षण अधिनियम के तहत लीज का नवीनीकरण संभव नहीं होने के बावजूद जमीन पर कब्जा बना रहा।

कई अदालतों तक पहुंचा मामला

वन विभाग की ओर से जारी नोटिसों को चुनौती देते हुए संस्था ने सिविल और जिला अदालतों का रुख किया था। वर्ष 2013 में राज्य सरकार ने 1.17 करोड़ रुपए की बकाया लीज राशि वसूलने के बाद भूमि वापस लेने का आदेश दिया था, लेकिन मामला राजनीतिक कारणों से लंबित रहा।

अपील भी खारिज

21 फरवरी 2026 को सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) की अदालत ने वन अधिनियम की धारा 64ए के तहत भूमि खाली करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ दायर अपील को अब सीसीएफ अदालत ने खारिज कर दिया है।

अदालत ने कहा है कि पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील और हाथियों के आवागमन वाले इस क्षेत्र में बने मकान, अन्य निर्माण और फसलों को अतिक्रमणकर्ता अपने खर्च पर हटाकर भूमि वन विभाग को सौंपें।

हाईकोर्ट जाने की संभावना

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्रभावित पक्ष उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसे देखते हुए विभाग ने पहले ही हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है।

आवश्यक समय दिया जाएगा

कानून के अनुसार वहां रह रहे लोगों को आवश्यक समय दिए जाने के बाद वन विभाग भूमि का कब्जा अपने हाथ में लेगा।
संदीप सूर्यवंशी, उप वन संरक्षण अधिकारी (डीसीएफ), सिरसी

प्रमुख घटनाक्रमों की जानकारी

वर्ष — प्रमुख घटनाक्रम
1969 — 389.07 एकड़ भूमि कामधेनु सहकारी संस्था को लीज पर दी गई।
1976 — लीज अवधि 30 वर्ष से घटाकर 20 वर्ष कर दी गई।
1989 — लीज की अवधि समाप्त हो गई।
1993 — डीसीएफ कार्यालय ने भूमि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की।
2010-2013 — सरकार ने बकाया लीज राशि वसूलने और भूमि लौटाने के निर्देश दिए।
2026 — सीसीएफ कोर्ट ने भूमि खाली कर वन विभाग को सौंपने का आदेश जारी किया।

प्रमुख तथ्य

कुल भूमि – 389.07 एकड़
अनुमानित मूल्य – 400 करोड़ रुपए से अधिक
क्षेत्र – गोलिकट्टा, सिरसी तालुक (उत्तर कन्नड़)
वर्तमान स्थिति – मुख्य वन संरक्षण अधिकारी (सीसीएफ) की अदालत ने भूमि तत्काल वन विभाग को सौंपने का आदेश दिया है।
संभावना – प्रभावित पक्ष के कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की संभावना के मद्देनजर वन विभाग ने पहले ही कैविएट दायर कर दी है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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