धर्मस्थल खोपड़ी प्रकरण
आइसोटोप विश्लेषण और डीएनए जांच के जरिए मृतकों की उम्र
खानपान और भौगोलिक पृष्ठभूमि का लगाया जाएगा पता
धर्मस्थल (दक्षिण कन्नड़). धर्मस्थल के बंगलेगुड्डा क्षेत्र से बरामद सात मानव खोपडिय़ों के रहस्य से पर्दा उठाना विशेष जांच दल (एसआईटी) के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मामले की जांच तेज कर दी गई है और अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले इन खोपडिय़ों की वास्तविक पहचान तथा उनकी भौगोलिक पृष्ठभूमि का पता लगाना जांच एजेंसियों की प्राथमिकता बन गया है।
आइसोटोप विश्लेषण तकनीक का लिया जाएगा सहारा
खोपडिय़ों के संबंध में सटीक जानकारी जुटाने के लिए एसआईटी अत्याधुनिक ‘आइसोटोप एनालिसिस’ तकनीक का उपयोग करने की तैयारी कर रही है। मास स्पेक्ट्रोमेट्री के माध्यम से की जाने वाली इस वैज्ञानिक जांच से मृतकों की अनुमानित आयु, खानपान की आदतों तथा वे किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित थे, इसका पता लगाया जा सकेगा। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि मृतक तटीय क्षेत्र के निवासी थे या किसी अन्य इलाके से जुड़े थे।
डीएनए परीक्षण के लिए भेजे गए नमूने
बंगलेगुड्डा में आत्महत्या की स्थिति में मिले मानव कंकालों के नमूनों को एसआईटी पहले ही डीएनए परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेज चुकी है। इसके साथ ही राज्य के विभिन्न हिस्सों से लापता व्यक्तियों का विवरण एकत्र किया जा रहा है।
आठ परिवारों के रक्त नमूनों की भी जांच
जांच के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए लोगों से जुड़े करीब आठ परिवारों के सदस्यों के रक्त नमूने भी एकत्र किए गए हैं। इनकी जांच के जरिए डीएनए मिलान की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, ताकि बरामद अवशेषों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
अंतिम रिपोर्ट के लिए पहचान जरूरी
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए बरामद खोपडिय़ों की मूल पृष्ठभूमि का पता लगाना बेहद महत्वपूर्ण है। एसआईटी इस दिशा में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह निर्धारित करने का प्रयास कर रही है कि ये अवशेष कम-से-कम किस क्षेत्र से संबंधित हैं, ताकि अंतिम रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख किया जा सके।
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