सरकार को सौंपा ज्ञापन
टाटा पावर को वितरण लाइसेंस देने का फैसला वापस लेने की मांग
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बबलेश्वर (विजयपुर). कर्नाटक राज्य किसान संघ और हसिरु सेना ने राज्य में बिजली वितरण के निजीकरण का विरोध करते हुए सरकार से हेस्कॉम को निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों ने तहसीलदार तथा हेस्कॉम के सहायक कार्यकारी अभियंता के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा।
निजीकरण वापस नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन
जिला अध्यक्ष संगमेश सगर ने कहा कि किसानों, उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए हेस्कॉम को टाटा पावर कंपनी लिमिटेड सहित अन्य निजी कंपनियों को बिजली वितरण लाइसेंस देने का निर्णय वापस लेना चाहिए। राज्य के सभी जिलों में किसान इसके विरोध में ज्ञापन सौंप रहे हैं। यदि सरकार अपने फैसले पर अड़ी रही तो राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को जाम कर व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
तालुक अध्यक्ष सुरेश किरेसूर ने कहा कि किसान पहले ही घाटे की खेती से जूझ रहे हैं। यदि बिजली क्षेत्र का निजीकरण हुआ तो खेती करना और अधिक कठिन हो जाएगा, जिससे भविष्य में खाद्यान्न संकट पैदा होने की आशंका बढ़ जाएगी।
किसानों और कर्मचारियों के हितों पर असर की आशंका
वरिष्ठ किसान नेता सुरेश शिरबूर और बसंत कांबले ने कहा कि सार्वजनिक धन से निर्मित बिजली के खंभे, तार और ट्रांसफार्मर निजी कंपनियों के लाभ का साधन बन जाएंगे।
पुट्टू गडदन्नवर और राजु नदाफ ने कहा कि बिजली विभाग के हजारों कर्मचारियों ने जोखिम उठाकर वर्षों तक सेवाएं दी हैं। निजीकरण से उनके रोजगार और भविष्य पर संकट खड़ा हो सकता है।
मुफ्त बिजली योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका
नेता महादेव बनसोड़े, रामनगौड़ा पाटिल, संगीता राठौड़ और युवा किसान नेता सिध्दराय चौधरी ने आशंका व्यक्त की कि पंपसेटों के लिए मुफ्त बिजली, गृह ज्योति, भाग्य ज्योति और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजीकरण की प्रक्रिया वापस नहीं ली तो राज्य के 31 जिलों में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
संतों ने भी जताया समर्थन
कार्यक्रम में उपस्थित विवेक देव ने किसानों को देश का अन्नदाता बताते हुए कहा कि समाज के सभी वर्ग किसानों के ऋणी हैं और किसी भी स्थिति में बिजली का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर विभिन्न मठों और धार्मिक पीठों का भी किसानों को समर्थन प्राप्त है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान, महिला कार्यकर्ता तथा संगठन के पदाधिकारी उपस्थित थे।
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