बारिश में मौत का खतरा: कुंदापुर-बयंदूर में खुले पड़े 20 से अधिक पत्थर खदान गड्ढे

खनन के बाद नहीं भरे गए गहरे गड्ढे, बारिश का पानी भरने से बने मौत के कुएं

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

कुंदापुर (उडुपी). उडुपी जिले के कुंदापुर और बयंदूर तालुक में लाल पत्थर के खनन के बाद छोड़े गए 20 से अधिक गहरे गड्ढे मानसून के दौरान लोगों और मवेशियों के लिए जानलेवा बन गए हैं। बारिश का पानी भर जाने से ये गड्ढे तालाब जैसे दिखाई दे रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।

दोनों तालुकों में लंबे समय से लाल पत्थर का खनन किया जा रहा है। हालांकि, कई स्थानों पर खनन समाप्त होने के बाद गड्ढों को नहीं भरा गया। इससे अब ये गहरे जलभराव वाले गड्ढे मौत के कुएं में तब्दील हो गए हैं।

जिम्मेदारी किसकी, यह बड़ा सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर खनन वैध है या अवैध, इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है। खनन विभाग का कहना है कि उसने केवल सीमित क्षेत्रों में ही अनुमति दी है, जबकि निजी पट्टा भूमि पर बने खदान गड्ढे उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। ऐसे में यदि किसी हादसे में जनहानि होती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

मशीनी खनन से बने विशाल गड्ढे

हाल के वर्षों में मशीनों से बड़े पैमाने पर खनन होने के कारण कई स्थानों पर विशाल गहरे गड्ढे बन गए हैं। नियमों के अनुसार बारिश शुरू होने से पहले इन्हें मिट्टी डालकर भरना अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर इस नियम का पालन नहीं किया गया। परिणामस्वरूप ये गड्ढे अब बारिश के पानी से लबालब भर चुके हैं।

इन क्षेत्रों में सबसे अधिक खतरा

कुंदापुर तालुक में अनुमति प्राप्त 11 पत्थर खदानें हैं, जबकि बयंदूर तालुक में आधिकारिक रूप से कोई पत्थर खदान नहीं है। इसके बावजूद हेस्कत्तूर, हल्नाडु, हरकाड़ी, अम्पारु, मोलहल्ली, हक्कूर, होसंगडी के कोंकेजेड्डु, यडमोगे के कुम्बीरबेरु, कारूर, तारेकोड्लु, रामपैजेड्डु, होसबालु, जांबे, कारिगड्डे, आजरी के यलबेरु, हल्लीहोले, कमलशिला, आलूर, गोलीहोले, अरेशिरूर, हेरंजालु और काल्तोडु सहित अनेक स्थानों पर ऐसे खतरनाक गड्ढे मौजूद हैं।

न सुरक्षा घेरा, न चेतावनी बोर्ड

अधिकांश गड्ढों की गहराई 12 से 18 फीट तक है और इनमें बड़ी मात्रा में पानी भरा हुआ है। न तो इनके चारों ओर सुरक्षा बाड़ लगाई गई है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खुले घूमने वाले मवेशियों और खेलते बच्चों के लिए ये गड्ढे गंभीर खतरा बन गए हैं।

जोखिमपूर्ण गड्ढे भरने की कार्रवाई की जाएगी

उडुपी खनन एवं भू-विज्ञान विभाग की वरिष्ठ भूवैज्ञानिक विंध्या ने कहा कि विभाग जिन खदानों को अनुमति देता है, वहां संचालकों को सुरक्षा उपाय अपनाने के स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं। निजी पट्टा भूमि पर बने खतरनाक गड्ढों को भरने के लिए संबंधित ग्राम स्तर पर निर्देश दिए जा रहे हैं। जहां भी ऐसे जोखिमपूर्ण गड्ढे पाए जाएंगे, उन्हें भरने की कार्रवाई की जाएगी।

 

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By Bharat Ki Awaz

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