सरकारी स्कूलों में टीसी पर विवादसरकारी स्कूलों में टीसी पर विवाद

नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू

सरकारी स्कूलों के बीच ऑनलाइन स्थानांतरण शुरू

निजी स्कूलों ने 1.5 लाख विद्यार्थियों का टीसी रोके जाने का लगाया आरोप

हुब्बल्ली. सरकारी विद्यालयों से निजी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) नहीं दिए जाने की शिकायतों के बीच राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों के बीच टीसी के ऑनलाइन हस्तांतरण की नई व्यवस्था लागू कर दी है। विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक विद्यार्थियों को सरकारी विद्यालयों में बनाए रखना बताया जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत सरकारी विद्यालय से स्थानांतरण चाहने वाले विद्यार्थी के लिए अब भौतिक टीसी जारी नहीं होगा। वर्तमान विद्यालय से इच्छित सरकारी विद्यालय तक एसएटीएस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन टीसी भेजा जाएगा। इसके लिए पहले उपलब्ध जनरेट टीसी विकल्प हटाकर एडमिट विकल्प जोड़ा गया है। संबंधित सरकारी विद्यालय का चयन कर विवरण सत्यापित करने के बाद छात्र का प्रवेश सीधे नए विद्यालय में दर्ज हो जाएगा।

निजी स्कूलों का आरोप

कर्नाटक एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकेंडरी स्कूल्स (कैम्स) ने आरोप लगाया है कि इस वर्ष करीब 1.5 लाख विद्यार्थियों ने निजी गैर-अनुदानित (अनुदान रहित) विद्यालयों में प्रवेश लिया है, लेकिन सरकारी स्कूलों ने उन्हें अब तक टीसी जारी नहीं किया। संगठन के महासचिव डी. शशिकुमार का आरोप है कि सरकारी विद्यालय अपने नामांकन के आंकड़े अधिक दिखाने के उद्देश्य से विद्यार्थियों का टीसी रोक रहे हैं।

नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य

राज्य में सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या घटकर लगभग 38 लाख रह गई है। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने इस वर्ष सरकारी स्कूलों को नामांकन में कम से कम 10 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य दिया है।

अभिभावकों के अधिकार का सवाल

निजी विद्यालयों का कहना है कि बच्चे किस विद्यालय में पढ़ेंगे, इसका निर्णय लेना विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का अधिकार है। ऐसे में टीसी देने से इनकार करना बच्चों के शिक्षा एवं मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

निजी विद्यालय संगठनों ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए शिक्षा विभाग को तत्काल टीसी जारी करने के निर्देश देने तथा सरकारी विद्यालयों की तरह निजी विद्यालयों के लिए भी ऑनलाइन टीसी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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