दक्षिण कन्नड़-उडुपी में सीआरपी की भारी कमीदक्षिण कन्नड़-उडुपी में सीआरपी की भारी कमी

रिक्त पदों से प्रभावित हो रही शैक्षणिक गतिविधियां, अधिकारियों पर बढ़ा कार्यभार

मेंगलूरु. दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में विद्यालय शिक्षा विभाग के क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) और ब्लॉक रिसोर्स सेंटर समन्वयक (बीआरसीसी) के बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय की अहम जिम्मेदारी निभाने वाले इन पदों पर नियुक्तियां नहीं होने से विद्यालयों में विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कठिनाई आ रही है।

दक्षिण कन्नड़ में आधे से भी कम अधिकारी

दक्षिण कन्नड़ जिले के सात शैक्षणिक क्षेत्रों में 114 सीआरपी पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 32 अधिकारी ही कार्यरत हैं। वहीं, सात बीआरसीसी पदों में से केवल दो पद भरे हुए हैं। मूडबिद्री में आठ स्वीकृत सीआरपी पदों पर एक भी अधिकारी नहीं है। बंटवाल, बेल्तंगडी, पुत्तूर, सुलिया और मेंगलूरु दक्षिण जैसे क्षेत्रों में भी अधिकांश पद रिक्त पड़े हैं।

उडुपी जिले में भी स्थिति चिंताजनक है। यहां 79 स्वीकृत सीआरपी पदों के मुकाबले केवल 31 अधिकारी कार्यरत हैं।

शैक्षणिक योजनाओं पर असर

सीआरपी 15 से 30 विद्यालयों वाले एक क्लस्टर की शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी करते हैं। पाठ्यपुस्तकों और गणवेश (यूनिफार्म) का वितरण, मध्याह्न भोजन योजना का समन्वय, शिक्षकों का प्रशिक्षण तथा विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार जैसे महत्वपूर्ण कार्य उनकी जिम्मेदारी में शामिल हैं। ब्लॉक स्तर पर इन गतिविधियों की निगरानी बीआरसीसी करते हैं।

तैनाती से बच रहे शिक्षक

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, राज्य स्तरीय परीक्षा के माध्यम से चयनित कई शिक्षक तटीय जिलों में सीआरपी के तौर पर पदस्थापना स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इससे उपलब्ध अधिकारियों पर कार्यभार लगातार बढ़ता जा रहा है और विभाग की कई प्रमुख गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

रुचि नहीं दिखा रहे योग्य शिक्षक

अन्य जिलों की तुलना में दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में सीआरपी की कमी अधिक है। योग्य शिक्षक इन पदों पर आने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, इसलिए इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार को नीति स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे।
शशिधर, डीडीपीआई, दक्षिण कन्नड़

 

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