करोड़ों की सुविधा बेकार, स्थानीय बसें भी नहीं करतीं प्रवेश
बारिश और धूप में हाईवे पर इंतजार को मजबूर यात्री
उप्पिनंगडी (दक्षिण कन्नड़)। जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक बस अड्डों की मांग लगातार उठ रही है, वहीं दक्षिण कन्नड़ जिले के नेल्याडी में बना सुसज्जित केएसआरटीसी बस स्टैंड पिछले 22 वर्षों से लगभग निष्प्रयोज्य बना हुआ है।
राष्ट्रीय राजमार्ग से सटा यह बस स्टैंड होने के बावजूद यहां न तो लंबी दूरी की बसें आती हैं और न ही स्थानीय रूट की बसें प्रवेश करती हैं। सभी बसें राजमार्ग पर ही यात्रियों को उतारने और चढ़ाने के बाद आगे बढ़ जाती हैं।
करीब दो एकड़ भूमि में निर्मित यह बस स्टैंड कडबा तालुक के कौक्राडी गांव में स्थित है। बेंगलूरु से मेंगलूरु आने वाली बसों के लिए यहां प्रवेश और निकास की पूरी व्यवस्था होने के बावजूद इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप यात्रियों, विशेषकर विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों को बारिश, धूप और तेज हवा के बीच हाईवे किनारे बस का इंतजार करना पड़ता है।
दो साल चली व्यवस्था, फिर थम गई बसों की आवाजाही
स्थानीय लोगों की मांग और छात्रों के आंदोलन के बाद वर्ष 2001 में इस बस स्टैंड का निर्माण किया गया था। शुरुआती दो-तीन वर्षों तक सभी बसें यहां आती थीं, जिससे दुकानों और होटलों का कारोबार भी अच्छा चलता था तथा शौचालय जैसी सुविधाओं का यात्रियों को लाभ मिलता था। लेकिन बाद में बसों ने यहां आना बंद कर दिया। परिवहन नियंत्रक का कार्यालय भी बंद हो गया और वर्षों से उस पर ताला लटका हुआ है।
सुविधाएं बेकार, पार्किंग बना बस स्टैंड
बस स्टैंड में बनी दुकानों के किरायेदारों के पास ग्राहक नहीं हैं। परिसर का रखरखाव भी नहीं हो रहा है। बस स्टैंड के सामने जलभराव और कीचड़ की स्थिति बनी रहती है, जिसकी सफाई स्थानीय दुकानदारों को करनी पड़ती है। वर्तमान में केवल कुछ निजी वाहन यहां खड़े होने से परिसर में थोड़ी-बहुत गतिविधि दिखाई देती है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि कम से कम स्थानीय रूट की बसों को नियमित रूप से बस स्टैंड में प्रवेश कराया जाए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था मिल सके।
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