हुब्बल्ली। बाजार में चमकदार रंग, आकर्षक स्वाद और कम कीमत देखकर खरीदा गया खाद्य पदार्थ वास्तव में कितना सुरक्षित है? यह सवाल अब हुब्बल्ली के उपभोक्ताओं के सामने खड़ा है। फल-सब्जियों से लेकर चिकन कबाब, गोभी मंचूरियन, मिठाइयों और तले खाद्य पदार्थों तक में कृत्रिम रंग, रसायनों और बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल के उपयोग की शिकायतें सामने आ रही हैं।
केला जल्दी पकाने का खेल
त्योहारों और मांग बढऩे के समय दूसरे जिलों से बड़ी मात्रा में कच्चे केले लाकर उन्हें कृत्रिम तरीके से पकाने की शिकायत है। ‘इंडोथाइल’ जैसे रसायनों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया जा रहा है। हालांकि, किसी खाद्य पदार्थ में प्रतिबंधित रसायन की मौजूदगी की पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही हो सकती है।

कबाब-मंचूरियन में रंग, तेल में बार-बार गर्मी
कुछ होटल और सडक़ किनारे खाद्य विक्रेताओं पर चिकन कबाब, गोभी मंचूरियन और अन्य व्यंजनों में कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल की शिकायत है। तले खाद्य पदार्थों के लिए तेल को बार-बार गर्म करने की प्रवृत्ति भी चिंता का विषय है। ऐसी प्रक्रिया से तेल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
अखबार में नाश्ता, सेहत पर सवाल
बन्स, पूरी, वड़ा पाव, गिरमिट, पकौड़े, समोसे और जलेबी जैसे खाद्य पदार्थों को अखबार में रखकर देने की शिकायत भी है। खाद्य पदार्थों के सीधे संपर्क में छपाई की स्याही आने की आशंका के कारण ऐसी पैकिंग पर रोक के बावजूद इसके इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं।
त्योहारों के मौसम में खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के बीच सवाल यही है कि बाजार में पहुंचने के बाद कार्रवाई से पहले, उपभोक्ता की थाली तक संदिग्ध खाद्य पदार्थ पहुंचने से कैसे रोका जाए?

नमूने होंगे तो खुलेगा सच
बड़े होटल और खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर नमूने प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि किसी रसायन का स्वास्थ्य पर प्रभाव उसके प्रकार और मात्रा पर निर्भर करता है।
–डॉ. श्रीधर दंडप्पनवर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम
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