सड़क नहीं, स्कूल भी दूर; बुल्लापुर तांडा बेहालबुल्लापुर तांडा की खस्ताहाल सडक़।

40 परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित

बच्चों को रोज 6-7 किमी पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है

दावणगेरे। तांडा, हाड़ी और हट्टियों को राजस्व गांवों में बदलकर वहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की सरकारी पहल के बावजूद दावणगेरे जिले के मायकोंड क्षेत्र का बुल्लापुर तांडा आज भी विकास से कोसों दूर है। करीब 40 परिवारों वाले इस छोटे से तांडे में सडक़, परिवहन और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रहा है।

मायकोंड होबली के अंतिम छोर पर स्थित यह तांडा हुच्चव्वनहल्ली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों के अनुसार यहां पहुंचने के लिए पक्की सडक़ नहीं है। कच्चे रास्ते के दोनों ओर झाडिय़ां और जंगली वनस्पतियां उग आई हैं। ग्रामीणों को रास्ते से गुजरते समय जंगली जानवरों का डर भी सताता रहता है।

बच्चों की पढ़ाई बनी चुनौती

तांडे में बस सेवा नहीं होने के कारण बच्चों को करीब तीन किलोमीटर दूर मायकोंड स्थित स्कूल तक पैदल जाना पड़ता है। आने-जाने में उन्हें प्रतिदिन करीब 6-7 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। बारिश, ठंड और तेज धूप में भी बच्चों को यही रास्ता अपनाना पड़ता है।

अधिकांश परिवार मजदूर हैं। बच्चों के स्कूल जाने के बाद उनके सुरक्षित लौटने तक माता-पिता चिंता में रहते हैं।

सडक़ और बस सेवा के साथ पट्टा दें

स्थानीय निवासी चंद्रा नायक, रुद्रण्णा, पापण्णा, मंजिबाई और सुशीलम्मा ने कहा कि हमारे गांव तक संपर्क सडक़ बनाई जाए। बच्चों के स्कूल आने-जाने के लिए रोजाना परिवहन निगम की एक बस उपलब्ध कराई जाए और हमारे घरों के पट्टे भी जारी किए जाएं।

युवा गणेश मेघावत ने कहा कि मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन दिया गया है, लेकिन अभी तक किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है।

15 परिवारों को ही मिला पट्टा

ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण तांडा विकास से वंचित है। राजस्व गांव के तहत सभी पात्र परिवारों को पट्टा मिलना चाहिए था, लेकिन अब तक केवल 15 परिवारों को ही पट्टा दिए गए हैं। पिछले महीने जिलाधिकारी जी.एम. गंगाधरस्वामी को भी ज्ञापन दिया गया था।

ग्रामीणों के अनुसार दशकों पहले एक बार तार सडक़ बनाई गई थी, लेकिन कुछ वर्षों में सडक़ पूरी तरह जर्जर हो गई। जगह-जगह गड्ढे हैं और दोनों ओर उगी झाडिय़ां रास्ते तक फैल गई हैं। वाहनों का आवागमन मुश्किल हो गया है और दोपहिया वाहन चलाना जोखिम भरा है।

बुल्लापुर निवासी रेणुकाबाई ने कहा कि सडक़ नहीं होने से हमारा आना-जाना ही मुश्किल हो गया है। जिलाधिकारी जब हमारे गांव आए थे, तब भी सडक़ बनाने की मांग की थी। लेकिन अभी तक काम नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सडक़ निर्माण, बस सेवा और लंबित पट्टा जारी करने की मांग की है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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